जिस नाम से इश्यू होगा रेमडेसिविर उसी को लगेगा, नहीं हो सकेगी कालाबाजारी
पटना
रमेश के नाम से इश्यू (जारी) हुआ इंजेक्शन अब सुरेश को नहीं लगेगा। बिहार में कोरोना से जुड़ी दवाओं के तय मूल्य से कोई ज्यादा भी नहीं वसूल सकेगा। कालाबाजारी करने वालों की भी खैर नहीं। जी हां! कोरोना काल में रेमडेसिविर जैसी सरकारी नियंत्रण वाले इंजेक्शन और दवाओं पर नजर रखने को अब राज्य सरकार ने नया तंत्र विकसित कर दिया है। इस काम के लिए एक नया सॉफ्टवेयर तैयार किया गया है, जिसका नाम है डिस्ट्रीब्यूशन एंड मॉनिटरिंग सिस्टम। राज्यस्तर पर नेशनल इनफार्मेटिक्स सेंटर (एनआईसी) द्वारा तैयार इस सॉफ्टवेयर से फिलहाल रेमडेसिविर की निगेहबानी की जा रही है, लेकिन जल्द ही इससे सरकार नियंत्रित दूसरी सभी जरूरी दवा और इंजेक्शनों पर भी नजर रखी जा सकेगी। गुरुवार से इस नए सॉफ्टवेयर ने काम करना आरंभ कर दिया है।
पूरी चेन को सॉफ्टवेयर से जोड़ा
रेमडेसिविर या अन्य सरकारी नियंत्रण वाली दवाएं या इंजेक्शन पहले बिहार मेडिकल सर्विसेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर कारपोरेशन (बीएमएसआईसीएल) के पास आती हैं। फिर उसे सीएंडएफ को भेजा जाता है। सीएंडएफ से इन इंजेक्शनों को 60-40 के अनुपात में क्रमश: सरकारी और निजी क्षेत्र के लिए आवंटित डिस्ट्रीब्यूटरों को दिया जाता है। हर जिले में तैनात एडीसी (असिस्टेंड ड्रग कंट्रोलर) मांग के अनुरूप अस्पतालों के लिए आवंटित करने की स्वीकृति देते हैं। अस्पतालों द्वारा तय राशि का भुगतान कर डिस्ट्रीब्यूटरों से उसे प्राप्त किया जाता है। फिर उस इंजेक्शन की कीमत लेकर उसे मरीज को लगाया जाता है। बीएमएसआईएल से लेकर मरीज तक की पूरी चेन को सॉफ्टवेयर से जोड़ा गया है। सभी एडीसी को नए सॉफ्टवेयर का प्रशिक्षण भी दिया गया है। जबकि अस्पतालों के प्रतिनिधियों को भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। भवन निर्माण विभाग के सचिव कुमार रवि इस नई व्यवस्था के नोडल अधिकारी बनाए गए हैं।
