कभी मेरठ से बहा करती थी गंगा नदी, मंदिर देते हैं गवाही

 मेरठ 
पौराणिक और ऐतिहासिक महत्व रखने वाले मेरठ से कभी गंगा बहा करती थी। शहर में स्थापित तीन गंगा मंदिर का इतिहास समृद्ध और प्राचीन है। यह मंदिर मां गंगा के होने की गवाही देते भी नजर आते हैं। इतिहासकारों का भी मानना है कि जहां कहीं भी गंगा मंदिर हैं वह वहीं हैं, जहां गंगा बहती है। वह आशंका जाहिर करते हैं कि हो सकता है कभी गंगा की धारा मेरठ तक आती हो लेकिन यह शहरवासियों की गंगा के प्रति अगाध आस्था ही है जो गंगा के ना होते हुए भी यहां मंदिर स्थापित हैं। संभावना है कि किसी समय में मेरठ से गंगा की धारा बहती होगी।

 मेरठ शहर में ऐसे तीन पुराने गंगा मंदिर हैं, जिनका इतिहास डेढ़ सौ साल पुराना है। इन मंदिरों की खासियत यह भी है कि ये मंदिर पहली मंजिल पर स्थापित हैं। इन मंदिरों के बारे में कहा जाता है कि इन्हें सेठ और साहूकारों ने अमावस्या और बुद्ध पूर्णिमा पर मां गंगा की विशेष पूजा-अर्चना के लिए बनवाया था। जत्तीवाड़ा गंगा मंदिर की प्रतिष्ठा 11 जून 1875 को मुंशी मूलचंद पुत्र लाला मंगलसेन सारस्वत ने कराई थी। मंदिर में मां गंगा की मूर्ति सफेद संगमरमर की स्थापित की गई है। कागजी बाजार गंगा मंदिर का निर्माण 1881 में साहूकार कल्याण सिंह द्वारा कराया गया था। यहां मंदिर में गंगा मां की दो मूर्तियां हैं। दोनों मूर्तियां सफेद संगमरमर की बनी हुई है।

प्रख्यात इतिहास कार डॉक्टर केके शर्मा बताते हैं कि तीसरा गंगा मंदिर पेड़ामल मोहल्ले में स्थित है। इसे भी दोनों गंगा मंदिरों के समकालीन ही माना जाता है। मंदिर में कोई शिलालेख ना होने के कारण सही तिथि बता पाना संभव नहीं है। यहां भी मां गंगा की मूर्ति विराजमान है। वह कहते हैं कि यह मंदिर पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र हो सकते हैं, सरकार को इस पर ध्यान देने की आवश्यकता है।

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