आदिगुरु शंकराचार्य प्राकट्य महोत्सव के पावन अवसर पर 17 मई को आयोजित होंगे दिव्य समारोह

रायपुर

आदिगुरु शंकराचार्य प्राकट्य महोत्सव के पावन अवसर पर 17 मई को देश के हर कोने में दिव्य समारोह आयोजित होंगे। पुरीपीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्रीनिश्चलानन्द सरस्वती जी महाभाग के पावन कृपा एवं आशीर्वाद फलस्वरूप इस महामारी संकटकाल में सभी भक्तजन अपने अपने घरों में रुद्राभिषेक शिवपूजन आराधना, सत्संग, संगोष्ठी, भजन संकीर्तन के द्वारा सर्वजनकल्याणार्थ संकल्प के साथ महाप्रभु के श्रीचरणों में सादर प्रार्थना समर्पित करेंगे, जिससे इस भीषण संकट का शीघ्र निवारण हो सके। सब स्वस्थ रहें, सुखी रहें, परिवार में, समाज में, देश में, विश्व में इस भावना के साथ ही सभी के सुख, शांति, समृद्धि की कामना तथा आपस में सद्भावपूर्ण संवाद के द्वारा सनातन संस्कृति के अनुरूप शासनतंत्र की स्थापना हो। ध्यान रहे आदिगुरु शंकराचार्य महाभाग ने आज से 2528 वर्ष पूर्व तात्कालीन शासनतंत्र ने जब सनातन संस्कृति को विनष्ट करने का षड्यंत्र किया तथा भारत को खंडित करने का प्रयास किया, तब उस संकट काल में इस अनीति के बिरूद्ध शंखनाद करते हुये अल्प समय में ही दिग्विजय यात्रा करते हुए। हिन्दुओं के प्रशस्त मान-बिन्दुओं की रक्षा करते हुये व्यासपीठ एवं शासनतंत्र का शोधनकर वैदिक साम्राज्य की स्थापना की। आज तीर्थ, धाम, मठ मंदिर आश्रम जो दिखाई पड़ रहे हैं, वे उस समय लुप्त हो गये थे। उसे पुन: प्रतिष्ठित किया तथा भजन, संकीर्तन, कथा, सत्संग, यज्ञ, पूजन आराधना को भारत में पुन: प्रतिस्थापित किया, इसलिये समग्र हिन्दू समाज के धर्मगुरु शंकराचार्य ही मान्य हैं। उसी परम्परा के स्थापना में गोवर्धनमठ पुरी के मान्य 145 वें जगद्गुरु शंकराचार्य कटिबद्ध होकर दिन-रात तत्पर हैं। उक्ताशय की जानकारी देते हुये आचार्य झम्मन शास्त्री ने बताया कि छत्तीसगढ़ प्रांत के विभिन्न जिलों एवं क्षेत्रों में शंकराचार्य जयंती उत्साहपूर्वक मनाया जाएगा। शासनतंत्र से धर्मसंघ पीठपरिषद्, आदित्य वाहिनी – आनन्द वाहिनी यह मांग करती है।

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