प्लाट के विक्रय पर नहीं, डेवलपमेंट की डील पर लगेगा जीएसटी

इंदौर। रियल एस्टेट में पहले सर्विस टैक्स के प्रावधानों को लेकर संशय था, अब जीएसटी के प्रावधानों पर यही स्थिति बन रही है। टैक्स प्रेक्टिशनर्स एसोसिएशन (टीपीए) इंदौर के आनलाइन सेमिनार में अध्यक्ष सीए मनोज गुप्ता ने यह बात कही। उन्होंने कहा, जीएसटी काउंसिल को रियल एस्टेट में निर्माण पर जीएसटी को लेकर बने भ्रम को स्पष्ट करना चाहिए। पूर्व के नियमों और फिर एडवांस रुलिंग से भ्रम की स्थिति बनी हुई है। आनलाइन सेमिनार में सीए डा अरविंद चावला ने प्लाट डेवलपमेंट और ज्वाइंट डेवलपमेंट एग्रीमेंट यानी रेशो डील के पहलुओं को जीएसटी के संदर्भ में स्पष्ट किया। उन्होंने कहा, जमीन और प्लाट में कानूनी अंतर है। केवल प्लाट बेचने पर तो कोई कर नहीं है, लेकिन प्लाट के मालिक ने किसी अन्य व्यक्ति से विकास का करार कर उसे बेचा, तो विकासकर्ता (डेवलपर) और प्लाट स्वामी के बीच होने वाले व्यवहार पर जीएसटी देना होगा। विकासकर्ता और जमीन मालिक के बीच साझे डेवलपमेंट के विभिन्न प्रचलित स्वरूप जैसे कि प्लाट या प्राप्तियों के बंटवारे के बारे में डा.चावला ने बताया विकासकर्ता को प्राप्त होने वाले हिस्से पर 18 प्रतिशत की दर से जीएसटी देना होगा। इसमें से वह विकास के दौरान किए खर्च पर दिए गए टैक्स की छूट ले सकेगा। उन्होंने देश की विभिन्न एडवांस रूलिंग प्राधिकरण के निर्णयों पर चर्चा करते हुए बताया कि वे सिर्फ आवेदक और उसके स्वरूप पर ही बाध्य हैं। उनसे सिर्फ मार्गदर्शन लिया जा सकता है, उन्हें कोर्ट के निर्णय के समकक्ष मानना भूल होगी।

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