कुलपति चयन प्रक्रिया में कोरोना का ग्रहण, हिंदी विवि और आरजीपीवी भेज चुका है सदस्यों के नाम

भोपाल
कोरोना संक्रमण ने प्रदेश के तीन विश्वविद्यालय के कुलपति चयन प्रक्रिया को स्थिर कर दिया है। क्योंकि राज्यपाल आनंदी बेन पटेल का लंबे समय से मप्र आगमन नहीं हुआ है। जबकि तीनों विवि के कुलपति उम्मीदवारों को आवेदन किये एक माह से ज्यादा का समय बीत गया है। इसलिए कुलपतियों की नियुक्ति में समय लग सकता है।

राजभवन को राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्वविद्यालय और महर्षि पाणिनी संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय के कुलपति की नियुक्ति करना है। तीनों विवि में कुलपति की नियुक्ति करने राजभवन डेढ़ सैकड़ा उम्मीदवारों के बायोडाटा मिल चुके हैं, लेकिन राजभवन उन बायोडाटा की स्कू्रटनी सर्च कमेटी फाइनल नहीं कर सकी हैं।  

हिंदी विवि की अंतिम तिथि नौ अप्रैल थी, जिसे बीते एक माह हो चुका है। विवि ने सर्च कमेटी में महाराजा छत्रसाल विवि के कुलपति प्रो. टीआर थापक को सदस्य चुना है। संस्कृत विवि उज्जैन की अंतिम तिथि 16 मार्च थी, जिसे बीते दो माह होने को है। जबकि आरजीपीवी की अंतिम तिथि निकले तीन माह होने वाले हैं। आरजीपीवी ने अपनी कार्यपरिषद रानी दुर्गावति विवि के कुलपति कपिल देव मिश्र को सदस्य चुना है। इसके बाद भी राजभवन के अपनी तरफ से तीनों विवि की सर्च कमेटी नहीं बना सका है। इसकी वजह कोरोना संक्रमण का हावी होना बताया गया है। क्योंकि राजभवन में संक्रमण के कारण स्टाफ को बुलाया नहीं जा रहा है। इसके चलते सभी प्रक्रिया रुकी हुई है।  

राजभवन ने तीनों विवि के विज्ञापन में कुछ खास निर्देश दिए थे, जिसके कारण कई उम्मीदवारों ने आवेदन नहीं किये हैं। इसमें आरजीपीवी कुलपति नियुक्ति करने एआईसीटीई की गाइडलाइन का पालन किया। इसलिए आरजीपीवी कुलपति बनने उम्मीदवार के पास इंजीनियरिंग डिग्री अनिवार्य है। वहीं, दस साल के शैक्षणिक अनुभव जरूरी है। इसके अलावा तीनों विवि के उम्मीदवार के खिलाफ लोकायुक्त, ईओडब्ल्यू या अन्य किसी एजेंसी में मामला दर्ज नहीं होना चाहिए। इस संबंध में आवेदन करने वाले को शपथ पत्र पर लिखकर देना होगा कि उसके खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं है। इसके साथ ही यदि प्रोफेसर शासकीय सेवा में सेवारत है, तो उसके खिलाफ  कोई विभागीय जांच भी प्रचलित नहीं होना चाहिए। 

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