त्वचा के साथ हड्डियों को खा रहा म्यूकोरमाइकोसिस फंगस, राजधानी में 66 मरीज भर्ती

भोपाल
कोरोना के बाद अब फंगस मरीजों के लिए संकट बन रहा है। कोरोना और डायबिटीज से पीड़ित मरीजों के लिए ह्यम्यूकोरमाइकोसिसझ् फंगस जानलेवा बन बन रहा है। यह फंगस कोरोना मरीजों का आंखों की रोशनी छीनने के साथ मरीजों की त्वचा यहां तक कि चेहरे की हड्डियों को भी खा रहा है। यही नहीं इलाज में थोड़ी सी देरी हो यह फं गस दिमाग तक पहुंच जाता है। ऐसी स्थिति में फंगस लगे हिस्से को निकालने के अलावा कोई और इलाज नहीं है। बीते सात दिनों में अकेले हमीदिया अस्पताल में ही ऐसे 14 मरीज भतीज् हो चुके हैं जिनमे से 8 मरीज हमेशा के लिए आंखों की रोशनी खो चुके हैं। जानकारी के मुताबिक शहर में अब भी 66 मरीज अलग अलग अस्पतालों में एडमिट हैं।

नेत्र रोग विशेषज्ञों के मुताबिक यह फंगस कैंडिडा फैमिली का ही सदस्य है। इसमें फैमिली में कैंडिडा के अलावा एस्परजिलम और म्यूकोरमाइकोसिस फंगस शामिल हैं। इनमें से म्यूकोरमाइकोसिस सबसे ज्यादा खतरनाक है। यह फंगस साइनस (नाक) से होते हुए आंख के आसपास जमा हो जाता है। सेंट्रल रेटाइनल आर्टरी का ब्लड फ्लो बंद हो जाता है, जिससे रोशनी हमेशा के लिए चली जाती है। वहीं इंफेक्शन ज्यादा होने पर त्वचा, हड्डी और दिमाग तक गलने लगता है।

हमीदिया अस्पताल ईएनटी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. यशवीर जेके के मुताबिक डायबिटीज पीड़ितों को स्टेरॉयड नहीं दिया जाता। लेकिन कोई तय ट्रीटमेंट गाईडलाीन ना होने के चलते कोरोना मरीजों को बड़ी मात्रा में स्टेरॉयड दिए जा रहे हैं, इससे इम्युनिटी वीक होती है, और यह फंगस हमला कर देता है।

इस फंगस के इलाज के लिए ईएनटी के साथ नेत्र रोग और न्यूरो सर्जन और एनिस्थिसिया विशेषज्ञों की जरूरत होती है। सभी एक्सपर्ट कम ही अस्पताल में एक साथ मिलते है। वहीं इसके लिए एकमात्र इंजेक्शन है जो 6 हजार रुपए का है जिसे दिन में दो डोज कम से कम दस दिन देना होते हैं। अगर संक्रमण बढ़ जाए तो आंख नाक और चेहरे के गले हुए हिस्से को निकाला जाता है।

यदि पलके झुक रही हों, डबल दिखाई दे रहा हो। आंख व सिर में दर्द हो। आंखों में लालपन हो, आंखें आकार में बड़ी दिखाई दे रही हों, आंख के नीचे सुन्नपन महसूस हो रहा है। यदि नाक में काले रंग का डिस्चार्ज हो रहा हो। नाक में सूखी पपड़ी जमी हो तो डॉक्टर से जरूर मिलें।

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