निजी अस्पतालों को नियुक्त करना होगा आयुष्मान मित्र, लैब का नाम बताना जरूरी

भोपाल
आयुष्मान कार्डधारकों के लिए निजी अस्पतालों में पैकेज तय करने के साथ सरकार ने यह निर्देश भी दिए हैं कि निजी अस्पतालों द्वारा अपने-अपने किसी एक कर्मचारी को अस्थायी तौर पर आयुष्मान मित्र नियुक्त करना होगा। इन कर्मचारियों को जिले के आयुष्मान मित्र और जिला समन्वयक आयुष्मान मित्र द्वारा प्रशिक्षित किया जाएगा।

 यदि ऐसे कोई मरीज आते है जिनके पास आयुष्मान कार्ड नही है, तो आयुष्मान मित्र कार्ड की डिटेल चेक करेगा। स्टेटस चेक करने के बाद कार्ड बनाया जाएगा। इसके लिए पृथक से अस्पतालों की यूजर आईडी भी बनाई जा सकेगी। यदि कोई मरीज जिसके परिवार में किसी अन्य सदस्य का कार्ड है लेकिन वो संक्रमित नही है, तो उनकी आईडी के आधार पर अन्य सदस्य का स्टेटस जांचा जाएगा और पात्र होने पर कार्ड बनेगा। साथ ही किसी अस्पताल के पास खुद की लैब नही है, तो वे जिस लेब से टेस्ट कराते हैं, उसकी डिटेल देना होगी, जिससे मरीजों को लाभ मिल सके और रिपोट्स का भी विधिवत क्लेम अस्पताल से किया जा सके। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री कोविड उपचार योजना दो दिन पहले लागू की गई है। इसमें आयुष्मान कार्ड धारक परिवार के साथ हर सदस्य का अलग से कार्य बनाने के निर्देश राज्य सरकार ने दिए हैं और कलेक्टरों से इसकी मानीटरिंग कराने को कहा है।

राज्य शासन द्वारा निर्धारित दर पर कोविड का इलाज करने के लिए संबंधित अस्पताल को भोपाल द्वारा जारी गूगल शीट में अपनी पूरी जानकारी भरनी होगी। ये जानकारी अस्पताल में मौजूदा स्थिति में डॉक्टरों सहित कर्मचारियों की पूरी जानकारी लैब सहित भरनी होगी। सीएमएचओ की अनुशंसा के बाद भोपाल से 48 घंटे में संबंधित अस्पताल को आयुष्मान के तहत इलाज के लिए अनुबंधित या इम्पेनल्ड किया जा सकेगा। इम्पेनल्ड करने की कार्यवाही भोपाल से ही होगी। आयुष्मान कार्ड धारकों के इलाज के लिए अस्पतालों की क्षमता जो भी हो, 20 प्रतिशत बेड रिजर्व करना होगा।

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