फसल की कटाई कर किसान नए जत्थे संग टीकरी बॉर्डर पहुंचे 

बहादुरगढ़
केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग को लेकर किसानों के नए जत्थे टीकरी बॉर्डर पहुंच रहे हैं। गेंहू की कटाई के चलते काफी प्रदर्शनकारी धरनास्थल से अपने खेत-खलिहानों पर चले गए थे, वे अब वापस लौट रहे हैं। बहादुरगढ़ में जुटे 5 दर्जन से ज्यादा किसानों ने कहा कि, भयंकर गर्मी के बीच भी वे सभाओं में भाग ले रहे हैं। मंच के माध्यम से लोगों को अफवाहों से दूर रहने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। एक वृद्ध किसान बोले कि, सरकार कोरोना की आड़ में अन्नदाता के आंदोलन को खत्म करने का प्रयास कर रही है। 

इसके लिए मनगढ़ंत बातें फैलाई जा रही हैं, मगर हम लोगों को इन पर ध्यान न देकर अपने हकों की लड़ाई जारी रखनी है। वहीं, संयुक्त किसान मोर्चा से जुड़े एक किसान नेता ने कहा कि, आंदोलन शांतिपूर्वक ही चल रहा है। सरकार को समझ लेना चाहिए कि किसान तब तक पीछे नहीं हटेगा, जब तक कि तीनों कानून निरस्त नहीं हो जाते। 

गेहूं की सरकारी खरीद बंद, आक्रोशित किसान बोले- 1-1 दाना खरीदने का दावा करने वाली खट्टर सरकार अब कहां है, हजारों क्विंटल गेहूं खुले में पड़ा है टीकरी बॉर्डर पर जुटने वाले प्रदर्शनकारियों ने आज तीन कृषि कानूनों के विरोध में टीकरी बॉर्डर पर मई दिवस को किसान मजदूर एकता दिवस के रूप में मनाने का फैसला भी लिया। यह निर्णय संयुक्त किसान मोर्चा और ट्रेड यूनियनों की ऑनलाइन आयोजित बैठक में लिया गया। वहीं पर किसानों का धरना लगातार जारी है। फसल की कटाई के बाद किसान अपने साथ नए जत्थे लेकर टीकरी बॉर्डर पहुंच रहे हैं। 

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