चैत्र नवरात्र कल से, मंदिरों में सिर्फ पुजारी ही कर सकेंगे पूजन

भोपाल
कोविड-19 संक्रमण के चलते 13 अप्रैल से शुरू हो रहे नवरात्र में भी मां, भक्तों से दूर रहेंगी। श्रद्धालु मंदिर पहुंचकर भी उनके दर्शन नहीं कर सकेंगे। हालांकि मंदिरों में प्रतिदिन की तरह पूजन-अर्चन जारी रहेगी। जबकि प्रसाद व चढ़ावा भी श्रद्धालुओं को मंदिर परिसर के बाहर लगी दान पेटियों में जमा करना होगा। प्रशासन की गाइड लाइन के चलते कोरोना संक्रमण के लिए चल रही पाबंदियों के चलते मंदिर समितियों ने भी तय किया है कि श्रद्धालुओं को भी कोई समस्या न हो, इसको देखते हुए मंदिरों को बंद रखा जाएगा। मां भवानी के मंदिरों में अलग-अलग व्यवस्थाएं की जा रही हैं।

घर में इशान कोण में स्थान को गोबर अथवा गंगा जल में हल्दी मिलाकर लेपन कर शुद्ध करें। चौकी पर लाल/पीला वस्त्र बिछाकर माता की तस्वीर, प्रतिमा स्थापित करें। साथ में गौरी, गणेश की प्रतिमा जरूर रखें। धातु के कलश में जल भरने के साथ उस पर लाल कपड़े में नारियल लपेटकर कलश पर रखें। हल्दी की गांठ, सिक्का रखें। पूर्व की ओर मुख कर शिखा बांध लें और तिलक करें। भगवान गणेश, अंबिका का कुमकुम, अबीर, हल्दी, अक्षत से पूजन कर वरुण देव का पूजन करें। इसके बाद विष्णु भगवान का स्मरण कर नौ दिन की आराधना करने का संकल्प लें।

 साथ ही मन में अपनी कामनाओं को भी जिक्र करें। शक्ति के अनुसार उपवास रखें। माता को हलवा, पूड़ी, खीर का भोग लगाएं। फल में अनार जरूर अर्पण करें।

घट स्थापना का मुहूर्त
सूर्योदय 6:09 पर होगा, द्विस्वभाव लग्न (मीन) 6:12 तक रहेगा। इस कालखंड में घट स्थापना सर्वश्रेष्ठ। 7:46 से 9:44 तक वृषभ लग्न तथा अभिजीत मुहूर्त। 12:02 से 12:52 तक भी घट स्थापना का मुहूर्त शुभ है।

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