हाईकोर्ट  ने कहा- क्या वैवाहिक विवाद के आधार पर पासपोर्ट रद्द किया जा सकता है?

 नई दिल्ली 
क्या वैवाहिक विवाद के आधार पर किसी का पासपोर्ट रद्द किया जा सकता है? इसे लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने बड़ी टिप्पणी की है। दिल्ली हाईकोर्ट  ने गुरुवार को कहा कि पक्ष रखने का मौका दिए बगैर वैवाहिक विवाद के चलते किसी व्यक्ति का पासपोर्ट रद्द नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने कहा है कि पासपोर्ट रद्द करना एक कठोर कदम है और प्रभावित व्यक्ति का पक्ष सुने बगैर ऐसा नहीं किया जा सकता।

जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह ने यह टिप्पणी उस व्यक्ति की याचिका पर की है जिनका वैवाहिक विवाद के चलते पिछले साल मई में पासपोर्ट रद्द कर दिया था। उन्होंने याचिका में पासपोर्ट को रद्द करने के मई 2020 के केंद्र सरकार के आदेश पर रोक लगाने की मांग थी। न्यायालय ने केंद्र सरकार से कहा कि वैवाहिक विवाद के आधार कर वह किसी के पासपोर्ट को हमेशा के लिए नहीं रोक सकता है। न्यायालय ने कहा है कि यह सिर्फ एक वैवाहिक झगड़ा है और आप उसका पासपोर्ट बहाल क्यों नहीं करते। न्यायालय ने सरकार से कहा कि आप जो कर रहे हैं, वो बेहद गलत है, आप किसी का पक्ष क्यों ले रहे हैं। 

केंद्र सरकार ने न्यायालय को बताया कि एक बार पासपोर्ट रद्द होने पर उसे दोबारा बहाल नहीं किया जा सकता। सरकार ने कहा कि याचिकाकर्ता को पासपोर्ट के लिए नए सिरे से आवेदन करना पड़ेगा। याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि उसे पासपोर्ट रद्द करने से पहले ना ही कोई नोटिस दिया गया और ना ही अपना पक्ष रखने का मौका। इसके जवाब में केंद्र सरकार ने न्यायालय को बताया कि याचिकाकर्ता को अमेरिका के ह्यूसटन में भारतीय मिशन के समक्ष पक्ष रखने का मौका दिया गया था। 

विदेश मंत्रालय से हलफनामा मांगा
इसके बाद न्यायालय ने विदेश मंत्रालय से हलफनामा दाखिल करने को कहा है। इसमें सरकार को यह बताने के लिए कहा गया है कि पासपोर्ट रद्द किए जाने से पहले याचिकाकर्ता को भारतीय मिशन के सामने अपना पक्ष रखने का मौका दिया गया था या नहीं। सरकार को मामले की अगली सुनवाई 23 अप्रैल से पहले जवाब देने को कहा है।

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