सालों पहले मर चुके 2715 लोग, अब भी एक सरकारी रिकॉर्ड में हैं जिंदा 

 गोरखपुर 
दस-बीस नहीं, 2715 ऐसे लोग हैं जिनकी मौत वर्षों पहले हो चुकी है लेकिन एक सरकारी रिकॉर्ड में सभी जिंदा हैं। पंचायत चुनाव की गहमागहमी के बीच यह बात सामने आई है। ये ऐसे लोग हैं, जिन्होंने तब आन-बान-शान की पहचान गन खरीदने के लिए अर्जी लगाई। गन लाइसेंस बनवाया और अपनी पसंद की गन भी खरीद ली। ताउम्र उसे साथ रखे। उम्र के अंतिम पड़ाव पर पहुंच गए लेकिन उन्होंने अपनी गन अपनों के नाम ट्रांसफर नहीं किया। अब वे इस दुनिया में नहीं हैं लेकिन लाइसेंसी शस्त्र धारकों की सूची में उनका नाम अभी भी शामिल है।

त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव का विगुल बज चुका है। चुनाव को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से सम्पन्न कराने के लिए वांछितों की युद्धस्तर पर गिरफ्तारियां की जा रही है। बदमाशों के खिलाफ गैंगस्टर और गुंडा एक्ट की कार्रवाई की जा रही है। मनबढ़ों को 107/16 में पाबंद किया जा रहा है। हिस्ट्रीशीटरों पर नजर रखी जा रही है। पुलिस कर्मियों द्वारा अराजक तत्वों को शांति भंग की आशंका के तहत गिरफ्तार भी किया जा रहा है। पुलिस द्वारा लाइसेंसी शस्त्र भी जमा कराए जा रहे हैं। लाइसेंसी शस्त्रों को जमा कराने के लिए सम्बंधित थानों में तैनात पुलिसकर्मी घर-घर जा रहे हैं। 

पुलिस कर्मियों के इसी अभियान के दौरान एक सचाई यह भी सामने आई है कि गोरखपुर जोन में 80437 लाइसेंसी शस्त्र धारकों में से 2715 लाइसेंसियों की वर्षों पहले मौत हो चुकी है। उनके परिवारीजन गन लाइसेंस नहीं बनवा पा रहे हैं। उनके पिता और दादा की निशानी शस्त्रों की दुकानों या फिर थानों के मालखानों में धूल फांक रही है। 

पुलिस ने 62 फीसदी असलहे जमा कराए
पंचायत चुनाव को लेकर पुलिस अधिकारियों द्वारा लाइसेंसी शस्त्रधारकों के शस्त्र जमा कराए जा रहे हैं। इसके लिए पुलिस कर्मियों द्वारा अभियान चलाया जा रहा है। गोरखपुर जोन में अब तक 62.61 फीसदी असलहे जमा करा लिए गए हैं। असलहा जमा कराने में सिद्धार्थ नगर जिले की पुलिस नम्बर वन है।

772 लाइसेंस हो चुके हैं निलम्बित
पुलिस और प्रशासनिक कार्रवाइयों के तहत गोरखपुर जोन में 772 लाइसेंसी शस्त्रधारकों के शस्त्र लाइसेंस निलम्बित किए जा चुके हैं। इन सभी के खिलाफ अलग-अलग थानों में मामले दर्ज हैं। इन सभी के खिलाफ आपराधिक मुकदमे न्यायालयों में लम्बित हैं।

 

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