प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार किसानों को सब्सिडी देने का प्लान

भोपाल। प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार किसानों को सब्सिडी देने का प्लान तैयार कर रही है। सरकार का मानना है कि जब रासायनिक खेती के लिए सरकार पहले ही सब्सिडी प्रदान करती है, तो प्राकृतिक खेती के लिए भी सब्सिडी प्रदान की जायेगी, ताकि किसान इसे प्रारंभ कर सकें। इसके लिए 1565 पूर्णकालिक नियुक्त किए जाएंगे जो गांवों में प्रचार करेंगे।
सीएम शिवराज सिंह चौहान ने तय किया है कि प्रदेश के 5200 गांवों में जून तक प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके लिए सभी 313 ब्लॉक में 5 पूर्णकालिक कार्यकर्ताओं की नियुक्ति करने की तैयारी है। यह कार्यकर्ता वह पूरे ब्लॉक में प्राकृतिक खेती की ट्रेनिंग देकर किसानों को प्रेरित करने का काम करेंगे और जो किसान प्राकृतिक खेती करेंगे उन्हें गाइड करने का भी काम करेंगे। प्राकृतिक खेती के लिए प्राकृतिक  कृषि बोर्ड का गठन सरकार कर रही है। इसके पहले सरकार ने तय किया है कि प्रदेश में पारंपरिक कृषि विकास योजना के अंतर्गत 99000 हेक्टेयर में प्राकृतिक खेती कराई जाएगी। जीरो बजट पर आधारित प्राकृतिक खेती के संबंध में प्रशिक्षण देने के लिए प्रदेश भर में 19 विभागीय प्रशिक्षण केंद्र तय किए गए हैं और इसके लिए 1.82 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। प्राकृतिक खेती के प्रचार प्रसार के लिए सरकार ने 50 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। इसके साथ ही नर्मदा नदी के दोनों किनारों किनारों पर 5 किलोमीटर के क्षेत्र में प्राकृतिक खेती कराने के लिए किसानों को जागरूक करने का अभियान चलाया जाएगा।

नर्मदा के दोनों किनारों पर साढ़े 4 लाख हेक्टेयर भूमि इस योग्य
सरकार को कृषि विभाग ने जो रिपोर्ट दी है उसके अनुसार नर्मदा नदी के दोनों तरफ 5 किलोमीटर के क्षेत्र में प्राकृतिक खेती के लिए जो एरिया तय हुआ है उसमें अलीराजपुर में 2912 हेक्टेयर, अनूपपुर में 21007, बड़वानी में 17079, देवास में 16050, धार में 27927, डिंडोरी में 68163, हरदा में 13594, होशंगाबाद में 54197, जबलपुर में 34822, खंडवा में 2338, खरगोन में 35692, मंडला में 25035, नरसिंहपुर में 59502, रायसेन में 31823 और सीहोर जिले में 33141 हेक्टेयर जमीन चिन्हित की गई है। इस तरह नदी के दोनों किनारों पर कुल 445283 हेक्टेयर क्षेत्र प्राकृतिक खेती के लिए जोत के रूप में उपयोग किया जा सकता है।

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