जनजातियों की राजनैतिक भागीदारी एवं महिलाओं पर योजनाओं का प्रभाव

भोपाल

 

अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान के पीएच.डी कोलोक्वियम में शुक्रवार को आयोजित सत्र मुख्यत: जनजातीय विकास पर फोकस रहा। इस सत्र में "जनजातीय विकास'' विषय पर 14 प्रस्तुतीकरण हुए। इनमें जनजातीय राजनैतिक भागीदारी, जनजातीय महिलाओं पर विभिन्न योजनाओं का प्रभाव, प्रवासन और सामाजिक-सांस्कृतिक रूप से जनजातियों को किस प्रकार प्रभावित करता है, जनजातियों से संबंधित आर्थिक चर्चा- जैसे महिलाओं के लिये कौशल विकास कार्यक्रम, आर्थिक प्रभाव, जनजातीय क्षेत्रों के विकास पर सीएसआर प्रभाव दृष्टिगोचर हैं। कारीगरों के उपक्रमों के माध्यम से जनजातियों की आजीविका के अवसरों के बारे में भी मंथन हुआ।

चेयरमेन पी.के. विश्वास तथा अन्य विद्वदजनों ने विषय के हर पहलू को स्पष्ट करते हुए विचार-विमर्श किया। पैनल ने इस बात पर जोर दिया कि उद्देश्यों को सुव्यवस्थित और स्पष्ट किया जाना चाहिये। साहित्य समीक्षा में नये शोध भी शामिल होने चाहिये। डेटा और अंतरदृष्टि पर ध्यान दिया जाना चाहिये। जनजातीय समुदाय में कम विकास के कारणों का पता लगाना होगा। जनजातियों को बाहरी जैसे दृष्टिकोण से न देखें। उनकी आजीविका के विकल्पों के विश्लेषण के दौरान केवल उत्पाद को नहीं देखा जाना चाहिये। मूल्य श्रृंखला विश्लेषण और लागत-लाभ विश्लेषण को भी अनुसंधान में शामिल किया जाना चाहिये।

 

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