लोकसभा-राज्यसभा टीवी की तर्ज पर हो सकता है सुप्रीम कोर्ट का भी चैनल, सुनवाई का सीधा प्रसारण

 नई दिल्ली।

उच्चतम न्यायालय में मुकदमों की सुनवाई और कार्यवाही का सीधा प्रसारण लोकसभा और राज्यसभा टीवी की तर्ज पर हो सकता है। कार्यवाही के सीधे प्रसारण के लिए सुरक्षित और समर्पित चैनल बनाने पर विचार किया जा रहा है। इस चैनल पर सिर्फ शीर्ष अदालत की कार्यवाही ही प्रसारित की जाएगी। सीधे प्रसारण के लिए नियमों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। उच्चतम न्यायालय की ई-कमेटी के अध्यक्ष जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने यह जानकारी देते हुए कहा कि इसके लिए काम तेजी से किया जा रहा है। जस्टिस चंद्रचूड़ नवंबर 2022 में देश के मुख्य न्यायाधीश बनेंगे।

उच्चतम न्यायालय की संविधान पीठ ने चार वर्ष पूर्व एक आदेश में शीर्ष अदालत की कार्यवाही का सीधा प्रसारण करने का आदेश दिया था। शीर्ष अदालत ने यह आदेश संसद की तर्ज पर दिया था। संसद के दो चैनल हैं, जो राज्यसभा और लोकसभा की कार्यवाही का सजीव प्रसारण करते हैं। माना जा रहा है कि सीधे प्रसारण से जहां वकीलों की दक्षता सुधरेगी, वहीं वादी भी अपने वकीलों पर नजर रख सकेंगे। वे यह भी जान सकेंगे कि जज ने क्या आदेश दिया। कर्नाटक और गुजरात उच्च न्यायालय ने 2021 से ही अपनी पूरी कार्यवाही का सीधा प्रसारण किया हुआ है। कोई भी व्यक्ति इन उच्च न्यायालयों की कार्यवाही को यूट्यूब पर देख सकता है। 

आंशिक रूप से सीधा प्रसारण
मौजूदा समय में उच्चतम न्यायालय की कार्यवाही का आंशिक रूप से सीधा प्रसारण हो रहा है। यह एक मोबाइल फोन एप के जरिये पत्रकारों, सुप्रीम कोर्ट के कर्मचारियों और संबंधित अधिकारियों को उपलब्ध है। इस एप पर प्रत्येक कोर्ट (17 बेंचें) की कार्यवाही सजीव देखी जा सकती है। जानकारों के अनुसार देश की हर अदालत में अब वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग है, ऐसे में उसका सीधा प्रसारण करने में कोई समस्या नहीं है।
 
कई देशों में सीधा प्रसारण
ब्रिटेन, कनाडा, अमेरिका, यूरोपीय न्यायालय और यूरोपीय मानवाधिकार न्यायालय की कार्यवाही का सीधा प्रसारण होता है। इन अदालतों की कार्यवाही की रिकॉर्डिंग भी ऑनलाइन उपलब्ध है, जिसे वेबसाइट से डाउनलोड किया जा सकता है।

 

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