170 करोड़ रुपए की लागत से भोपाल- इटारसी रूट पर रेलवे ट्रैक के किनारे हो रहा निर्माण

भोपाल
वन्य प्राणियों को रेलवे ट्रैक पर ट्रेन से बचाने के लिये भोपाल-इटारसी के बीच  के रूट पर 170 करोड़ रुपए की लागत से रेलवे  ट्रेक के किनारे जाली और सुरंगों का निर्माण कर रहा है। यह अगले साल तक पूरी होने की उम्मीद है। इसके चलते  मिड घाट और चौका केबिन की नई बिल्डिंग बनकर तैयार हो चुकी हैं।

अब नई बिल्डिंग से कंट्रोल पैनल से ट्रैन ट्रैफिक कंट्रोल किया जाएगा। अभी तक करीब 50 से 60 साल पुरानी केबिन बिल्डिंग में कम चल रहा है। जब यह प्रोजेक्ट बनकर पूरा हो जाएगा तो बीना-भोपाल-इटारसी के बीच 130 किमी प्रति घंटे की गति से ट्रेन चलेंगी। रातापानी सेंचुरी में वन्य प्राणियों को बचाने की कवायद शुरू की गई है। इसके चलते रेलवे ट्रैक पर इंफ्रारेड सेंसर लगाये जा रहे हैं। इनके जरिए वन्यप्राणियों के गुजरने पर इमेज कैप्चर होगी और सायरन बज उठेगा।

 इसके अलावा रातापानी सेंचुरी से गुजरने वाली रेलवे लाइन पर वन्य प्राणियों के रास्ते के लिए ओवर और अंडर पास तो बन रहे हैं, लेकिन कुछ स्थान ऐसे हैं जहां ओवर और अंडर नहीं हैं, ऐसे ट्रैक पर विदेशी तकनीक को अपना जाएगा। इसके पायलट प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है। यह सेंसर वाली तकनीक ऐसी होगी कि जैसे ही वन्य प्राणी ट्रैक पर पहुंचेगा, वैसे ही सेंसर इंफ्रारेड किरणों के माध्यम से थर्मल इमेंज को कैप्चर करेगा और सायरन बजने लगेगा। अभी इसका प्रयोग स्वीडन में हो रहा है। वहीं देश में कुछ राज्यों में भी पायलट प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है।

क्या स्थिति है
इटारसी से भोपाल के बीच बन रही तीसरी रेल लाइन पर काम तेजी से चल रहा है। रेलवे बरखेड़ा-बुदनी घाट सेक्शन में आधुनिक तकनीकी से पांच आस्ट्रियन सुरंगों का निर्माण भी हो रहा है। इनको वन विभाग के एक्सपर्ट की राय के अनुसार बनाया जा रहा है। इन 5 सुरंगों में 2 सुरंगे डबल ट्रैक वाली हैं। प्रदेश  में यह पहला मौका है जब रेलवे 2 ट्रैक वाली सुरंग बनवा रहा है। इसके अलावा, 20 अंडरपास और 5 ओवरपास बनाए जा रहे हैं।ट्रैक के बगल में जानवरों के लिए स्टॉप डैम बनाने का काम भी चल रहा है ताकि वो अपनी प्यास बुझा सकें। रेलवे ने वन्यजीवों की रक्षा के लिए सुरंग निर्माण का फैसला किया था।

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