वन कर्मचारी संघ छत्तीसगढ़ की अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी

कोरिया। अनिश्चित कालीन हड़ताल छत्तीसगढ़ के वन कर्मियों ने कर रखा है इनकी मांग है कि हमे शासन की योजनाओं का सुविधा नही मिलता जिस वजह से छत्तीसगढ़ वन कर्मचारियों के द्वारा शासन के खिलाफ मोर्चा खोला गया है ।

जब से महाराष्ट्र की सरकार ने वन कर्मियों को सुविधा प्रदान की है तब से अन्य राज्यों के वन कर्मियों ने भी शासन से सुविधाएं मिल सके इस तार तम्य मे छत्तीसगढ़ के वन कर्मी ने भी अपनी 12 मांग को हवा दिया है

इस बीच मनेन्द्रगढं वन मंडल के बहेरासी वन क्षेत्र के कर्मियों का भी कहना है कि हमे भी शासन से कुछ प्रमुखमांग है जिसे शासन को लागू करना चाहिए इन सभी की मांग है कि वन रक्षक का वेतन मान 3050 ? किया जाये, वनरक्षक वनपाल, वन क्षेत्रपाल कर्मचारियों का वेतनमान मांग अनुसार निर्धारण किया जाए। पुरानी पेंशन जैसी योजनाओं को भी लागू करने की बात इन कर्मियों के द्वारा की जा रही है। छत्तीसगढ़ राज्य गठन के पश्चात जो नया सेटअप पुनरीक्षण किया जाए महाराष्ट्र सरकार की तरह 5000रुपए पौष्टीक आहार, वर्दी भत्ता दिया जावे जो वन कर्मी पद नाम सहित भर्ती हेतु संबोधित नाम अन्य पश्चात निर्धारण आदेश जारी किया जावे वनोपज संघ के कार्य हेतु एक महा का अतिरिक्त वेतन दिया जावे कास्ट वनोपज प्रदाय से कमी मात्रा की वसूली निरस्त / राइट आॅफ किया जावे विभागीय पर्यटन स्थल में निशुल्क प्रवेश दिया जावे वनपाल प्रशिक्षण अवधि 45 दिन किया जावे। प्रशिक्षण केंद्र कोनी बिलासपुर से प्रारंभ किया जावे भृत्त वानिकी चौकीदार का समायोजन किया जावें। दैनिक वेतन भोगी श्रमिकों को नियमित किया जावे अन्य कई ऐसे प्रमुख मांगे हैं जो वन कर्मियों के द्वारा रखा गया है जो कि छत्तीसगढ़ प्रदेश के प्रत्येक जिलों में व ब्लॉकों में कर्मचारियों के संघ के द्वारा अनिश्चितकालीन हड़ताल पर है।वहीं दूसरी तरफ वनों की सुरक्षा नहीं हो पा रही है इन कर्मियों की हड़ताल पर जाने से वनों को काफी क्षति पहुंच रही है गर्मियों के मौसम में पेड़ पौधों के पत्ते सूख कर जमीन के आसपास बिखर जाते हैं जिससे आग भी लग जाती है जिससे सारा जंगल धू धू करके जलता है इनकी सुध लेने के लिए कोई वन कर्मी अपने कक्ष क्रमांक में उपस्थित नहीं रहता अपने बीट में उपस्थित नहीं रहने के वजह से जंगल को काफी नुकसान हो रहा है क्योंकि जंगल राष्ट्र और विश्व की अमूल्य धरोहर है इनकी सुरक्षा वन अधिकारियों कर्मचारियों व आम जनमानस का दायित्व बनता है ।

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