मप्र विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (मैपकास्ट) की लडखडा रही है आर्थिक व्यवस्था
भोपाल। मप्र विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (मैपकास्ट) की आर्थिक व्यवस्था लडखडा रही है। अधिकारी और वैज्ञानिकों को वेतन तक देने में शासन आनाकानी कर रहा है। अब शासन ने विद्यार्थियों को कूचलना तक शुरू कर दिया है। विद्यार्थियों को मिलने वाली स्कालरशिप दो साल से बंद कर रखी है।
मैपकास्ट में अधिकारी, कर्मचारी और वैज्ञानिकों के वेतन का क्राईसेस लंबे समय से चल रहा है। यहां तक मैपकास्ट परिसर में बने मकान भी मरम्मत की दुहाई दे रहे हैं। बार-बार बजट मांगने के बाद भी शासन मैपकास्ट की तरफ पीट करे हुये है। अब आलम यह है कि शासन ने स्कूलों के प्रतिभावान विद्यार्थियों को मिलने वाली स्कालरशिप भी आवंटित करना बंद कर दिया है। गत वर्ष कोरोना संक्रमण के कारण स्कालरशिप नहीं दी गई। वर्तमान में भी विज्ञान मंथन यात्रा के लिये दो करोड रुपये का बजट आवंटित नहीं किया गया है। दो साल में शासन ने चार करोड रुपये बचा लिये हैं। जबकि स्कालरशिप लेने के लिये दोनों वर्ष हजारों विद्यार्थियों ने आवेदन जमा किये थे। शासन की नीति के आगे विद्यार्थियों को खाली हाथ ही रहना पड रहा है। विज्ञान मंथन यात्रा से शुरू हुआ मिशन एक्सीलेंस दो साल से अपना दम तोड रहा है।
हर साल होता है 625 का सिलेक्शन
मैपकास्ट विज्ञापन जारी कर विद्यार्थियों क आवेदन जमा कराता है। इसमें आठवीं कक्षा से 12वीं कक्षा तक के 625 स्कूली विद्यार्थियों का चयन किया जाता है। इन्हें भौतिक रूप से देश में प्रमुख प्रयोगशाला और अन्य संस्थाओं का निरीक्षण कराया जाता है। इसके बाद उनकी एक परीक्षा आयोजित कराई जाती है। इसमें टाप 100 विद्यार्थियों को आगामी पढ़ाई से लेकर पीएचडी करने तक आजीवन स्कालरशिप दी जाती है। विगत दो वर्षों से मैपकास्ट आवेदन जमा कराकर वचुर्अल विजिट करा रहा है, लेकिन उनकी परीक्षा नहीं करा रहा है। इसकी वजह शासन द्वारा स्कालरशिप के लिये बजट आवंटित नहीं करना है।
हर साल मिलते हैं दो करोड
विज्ञान मंथन यात्रा कराने के लिये शासन हर साल दो करोड रुपये देती है। क्योंकि यात्रा से मिशन एक्सीलेंस के लिये चुने गये 100 विद्यार्थियों को पांच साल तक स्कालरशिप देने के लिये दो करोड रुपये का बजट दिया जाता है। बजट के अभाव में मैपकास्ट सिर्फ वचुर्अल विजिट करा रहा है, लेकिन विद्यार्थियों की प्रतिभा परखने उनकी परीक्षा नहीं ले रहा है।
