जीपीएस लोकेशन ट्रैकर बनेगा निगम के लिए सिरदर्द
भोपाल। इस बार के स्वच्छता सर्वेक्षण 2022 में भोपाल की स्थिति क्या होगा यह एक बड़ा सवाल है। निगम इसके लिये तमाम रणनीति बना रहा है पर सर्वे के लिये दिल्ली से आने वाली टीम की वर्किंग उसके लिये परेशानी का सबब बन सकती है। यह टीम जीपीएस लोकेशन से ही स्पॉट तलाश कर अपना रूट बनाएगी जिससे निगम को अपनी बिसात बिछाने में दिक्कत होगी। निगम प्रशासन का इस बार फोकस वाटर प्लस के साथ ही फाइव स्टार रेंटिंग हासिल करने का है। इसके लिये उसको अपने उन नालों को छिपाना है जो तालाबों में गंदगी फैलाते हैं। इसके लिये शहर के नालों को साफ दिखाने के लिये निगम भारी कवायद कर रहा है। लेकिन सीवेज के मिस-मैनजमेंट ने उसकी हालत खराब करके रखी है। इसके अलावा पुराने शहर की गलियों की नियमित सफाई नहीं होना भी उसके लिये एक बड़ी दिक्कत बन सकती है।
दस मार्च के बाद आ सकती है सर्वे टीम
स्वच्छ सर्वेक्षण-2021 के लिए 10 मार्च के बाद कभी भी सर्वेक्षण टीम भोपाल शहर में आ सकती है। इसके लिए नगर निगम ने तैयारियां भी तेज कर दी है। शहर से गुजरने वाले 42 नालों की सफाई के बाद ऐसी ही कुछ जगह पर बैडमिंटन व बॉलीबॉल खेलने की शुरूआत की गई है। इसके अलावा आदमपुर छावनी की पांच एकड़ लैंडफिल साइट का समतलीकरण किया गया है। नगर निगम का ऐसे क्षेत्रों में फोकस है, जहां अतीत में केंद्रीय सर्वे टीम निरीक्षण के लिए गई थी। हालांकि, आॅनलाइन तरीके से ही क्षेत्र तय होंगे। पिछले सर्वेक्षण में भोपाल देश के सबसे साफ शहरों में सातवें नंबर पर था। अब की बार अव्वल आने के लिए पूरा जोर लगाया जा रहा है।
स्वच्छता की कसौटी पर
स्वच्छता सर्वेक्षण में भोपाल की छवि सुधारने के लिये वैसे तो निगम की पूरी टीम को ही तीन माह पहले मैदान में उतार दियागया है। लेकिन मुख्य फोकस इस समय एमपी सिंह, पवन कुमार सिंह, सहित सभी एडीसी की है। इसके अलावा वाटर प्लस के मामले में झील संरक्षण प्रकोष्ठ के अधीक्षण यंत्री संतोष गुप्ता, आरके गुप्ता पर सबकी निगाहे हैं। सीवेज मैनेजमेंट की कमान एमएस सेंगर और उनकी टीम पर है। अब देखना यह है कि इनमें से कौन स्वच्छता की कसौटी पर खरा उतरता है।
पूरा हुआ सर्टिफिकेशन का काम
निगम ने पिछले महीने दस्तावेज अपलोड किए थे। पिछली बार सर्टिफिकेशन में निगम को 1500 में से 1100 अंक मिले थे। अब की बार एहतियात बरती गई, ताकि पिछले सर्वेक्षण की तुलना में अधिक अंक मिल सके। यह प्रक्रिया पूरी करने के बाद अब निगम अधिकारी मैदानी कार्यों पर फोकस करने में जुटे हैं। खासकर सीवेज, डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन पर विशेष नजर रखी जा रही है। शहर के सभी 85 वार्डों में टीमें तैनात की गई है, पर इनकी वॉचिंग नहीं हो रही है।
