द कश्मीर फाइल्स: ब्यूरोक्रेट की टिप्पणी पर विवाद, नियाज खान की बढ़ सकती हैं मुश्किलें

भोपाल
एमपी कैडर के आईएएस अधिकारी नियाज खान द्वारा द कश्मीर फाइल्स फिल्म को लेकर किए गए ट्वीट के बाद अब उनकी मुश्किलें बढ़ सकती हैं। नियाज ट्वीट से नाराज शिवराज सरकार के मंत्री विश्वास सारंग इस मामले में डीओपीटी को पत्र लिखकर उन पर सिविल सर्विसेस कोड के अंतर्गत कार्यवाही की मांग करने वाले हैं। वहीं जीएडी की प्रमुख सचिव दीप्ति गौड़ मुखर्जी ने इस पर सोमवार को विचार करने की बात कही है।

मंत्री ने कहा है कि आईएएस अधिकारी खान अपनी सीमा लांघ रहे हैं। इसको लेकर वे आज ही कार्मिक विभाग (डीओपीटी) को पत्र लिखकर खान के विरुद्ध कार्यवाही की मांग करेंगे। गौरतलब है कि आईएएस नियाज ने लिखा था कई राज्यों में बड़ी संख्या में मुसलमानों की हत्याओं को दिखाने के लिए एक फिल्म भी बनानी चाहिए। मुसलमान कीड़े नहीं बल्कि इंसान और देश के नागरिक हैं। पूर्व मुख्य सचिव निर्मला बुच ने कहा कि बोलने से पहले सोचना चाहिए। इस प्रकरण को लेकर कहा कि चाहे सेवा में हों या रिटायर आईएएस अफसर हों। अब अगर नियाज खान के मामले में कोई जवाब मांगा जाता है तो वे देंगे।

ट्वीट कर कही ये बात
नियाज खान ने दूसरा ट्वीट किया- कश्मीर फाइल ब्राह्मणों का दर्द दिखाती है. उन्हें पूरे सम्मान के साथ कश्मीर में सुरक्षित रहने की अनुमति दी जानी चाहिए. निर्माता को कई राज्यों में बड़ी संख्या में मुसलमानों की हत्याओं को दिखाने के लिए भी एक फिल्म बनानी चाहिए. मुसलमान कीड़े नहीं, बल्कि इंसान हैं और देश के नागरिक हैं.

कई किताबें लिख चुके खान
गौरतलब है कि नियाज खान फिलहाल लोक निर्माण विभाग में उप सचिव के पद पर हैं. वे कई किताबें लिख चुके हैं. खान अपने धर्म की हिंसक छवि को मिटाने के लिए भी रिसर्च कर रहे हैं. उनका मानना है कि इस्लाम के बदनाम होने के पीछे कई संगठनों की खराब छवि है.

इन शहरों से निर्माता का खास कनेक्शन
बता दें, द कश्मीर फाइल्स निर्माता-निर्देशक विवेक अग्निहोत्री का मध्य प्रदेश के प्रमुख शहर भोपाल- ग्वालियर के साथ उत्तर प्रदेश से भी खासा नाता है. विवेक ग्वालियर में पले-पढ़े हैं. उनकी हायर एजुकेशन भोपाल में हुई. दरअसल, उनके पिता डॉ. प्रभुदयाल अग्निहोत्री ने भोपाल और ग्वालियर में कई दिनों तक पदस्थ रहे. विवेक गलियों, मैदानों पर पत्थर की गोटियों से सितौलिया और कबड्‌डी खेला करते थे. उनके दोस्त ने बताया कि डायरेक्शन देने का शौक तो उन्हें बचपन से था. कोई भी बात होती, वह दोस्तों को डायरेक्शन देने लगता था.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *