प्रतिबंध का असर: बिटकॉइन ने पूंजीकरण में रूसी रूबल को दी पटखनी

नई दिल्ली |
अमेरिका, यूरोपीय देश और जापान केकड़े प्रतिबंध का असर रूबल पर पड़ा है। डॉलर के मुकाबले रूबल में तेज गिरावट देखने को मिली है। यूक्रेन पर रूस का हमला शुरू होने के बाद से रूबल करीब 30 फीसदी गिर चुका है। रूस को स्विफ्ट प्रणाली से बाहर करने का असर क्रिप्टो बाजार में देखा गया। अभी बिटकॉइन का मार्केट कैप लगभग 835 बिलियन डॉलर है, जबकि रूबल का मार्केट कैप लगभग 626 बिलियन डॉलर रह गया है। मार्केट वैल्यू के लिहाज से बिटकॉइन 14वें स्थान पर है, जबकि रूबल 17वें पायदान पर है।पिछले हफ्ते बिटक्वाइन गिरकर 35,000 डॉलर पर आ गया था। उसके बाद से इसमें 20 फीसदी से ज्यादा तेजी आई है। प्रतिबंधों का रूस की अर्थव्यवस्था पर असर दिखने लगा है। रूसी केंद्रीय बैंक ने रूबल को गिरने से बचाने के लिए कोशिश की है। लेकिन, रूबल को गिरने से बचाने की उसकी क्षमता भी कम हो गई है। अभी बुधवार को बिटकॉइन का भाव 44 हजार डॉलर से ऊपर निकल गया तो क्रिप्टोकरंसी के पूरे बाजार की वेल्यूएशन दो ट्रिलियन डॉलर कोपार कर गई।

रूबल की कमजोरी दूर करने में लगा रूस
रूस के केंद्रीय बैंक ने रूबल को गिरने से बचाने के लिए मुख्य ब्याज दर को 20 फीसदी कर दिया है। इसके अलावा रूसी कंपनियों को विदेशी मुद्रा में अपनी 80 फीसदी आय को घरेलू बाजार में परिवर्तित करने को कहा है।

रूस ने गैस सप्लाई से यूरोप पर बढ़ाया दबाव
रूस आर्थिक प्रतिबंधों के बावजूद यूरोप की करीब 40 फीसदी गैस की सप्लाई को बरकरार रखे हुए है। इससे उसे रोजाना करीब 35 अरब डॉलर की कमाई हो रही है। इसी के दम पर वह यूरोप से टक्कर ले पा रहा है।वह यूरोपीय देशों को सीधे युद्ध में कूदने से रोकने के लिए इसे हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहा है। फ्रांस, जर्मनी ने कहा है कि 120 से ऊपर निकला कच्चा तेल उनके लिए मुसीबत खड़ी कर रहा है। उन्होंने गैस की आपूर्ति को लेकर रूस पर अपनी निर्भरता को देखते हुए यूक्रेन के पक्ष में अपने सैनिक उतारने से भी इनकार कर दिया है।

रूस और यूक्रेन ने क्रिप्टो को बनाया हथियार
रूस ने आर्थिक प्रतिबंधों की काट क्रिप्टो के रास्ते से निकाली है। इस तरह से वह अपने विदेशी मुद्रा भंडार का इस्तेमाल कर रहा है। वहीं खबरों पर भरोसा करें तो यूक्रेन को लगातार दुनियाभर से आभासी मुद्रा में आर्थिक सहायता मिल रही है। पिछले एक हफ्ते में क्रिप्टोकरंसी में जो उछाल देखा गया है उसकी वजह यह भी है। कॉइनशेयर की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले हफ्ते अमेरिका में क्रिप्टो मार्केट में 95 मिलियन डॉलर का इनफ्लो दर्ज हुआ। वहीं, यूरोप में इस बाजार से 59 मिलियन डॉलर की निकासी देखी गई।

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