UN में यूक्रेन मुद्दे पर भारत के रुख की रूस ने की तारीफ, कहा-संवाद बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं
नई दिल्ली
रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध को लेकर शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में रूस के खिलाफ प्रस्ताव लाया गया था। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में रूस की निंदा वाले प्रस्ताव पर भारत ने मतदान नहीं किया था। सुरक्षा परिषद में यह प्रस्ताव अमेरिका की तरफ से पेश किया गया था। अब यूएन में भारत के इस रुख की रूस ने तारीफ की है। रूसी दूतावास की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि, 25 फरवरी को यूएनएससी में मतदान में भारत की स्वतंत्र और संतुलित स्थिति की अत्यधिक सराहना करते हैं।
सुरक्षा परिषद में मतदान के एक दिन बाद भारत में रूसी दूतावास की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि, हम 25 फरवरी 2022 को यूएनएससी में मतदान में भारत की स्वतंत्र और संतुलित स्थिति की अत्यधिक सराहना करते हैं। विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी की भावना में रूस यूक्रेन के आसपास की स्थिति पर भारत के साथ घनिष्ठ संवाद बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं। प्रधानमंत्री मोदी की इससे पहले रूस के राष्ट्रपति व्लादीमीर पुतिन से बातचीत हो चुकी है।
रूसी दूतावास के इस ट्वीट के नीचे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में हिस्सा ले रहे भारत के स्थायी प्रतिनिधि टीएस तिरुमूर्ति के बयान का वीडियो लगा हुआ है। जिसमें तिरुमूर्ति यूएनएससी की बैठक में भारत के विचार को रखते दिखाई दे रहे हैं। भारत के स्थायी प्रतिनिधि तिरुमूर्ति ने कहा कि यूकेन के मौजूदा हालात पर भारत गहरी चिंता व्यक्त करता है। हम सभी पक्षों से हिंसा और शत्रुता जल्दी खत्म करने की अपील करते हैं। मानव जीवन की कीमत पर कोई निदान नहीं निकल सकता। हम यूक्रेन में फंसे भारतीयों की सुरक्षा को लेकर हम बहुत चिंतित हैं।
गौरतलब है कि भारत ने यूक्रेन संकट पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में रूस की निंदा वाले प्रस्ताव पर मतदान नहीं किया था। भारत ने समाधान का कोई रास्ता निकालने और कूटनीतिक बातचीत को बढ़ावा देने के लिए सभी पक्षों तक संपर्क का विकल्प खुला रखा है। आधिकारिक सूत्रों ने शनिवार कहा कि भारत ने प्रस्ताव पर मतदान तो नहीं किया है, लेकिन साथ ही देशों की ''संप्रभुता व क्षेत्रीय अखंडता'' का सम्मान करने का आह्वान भी किया है।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में रूस के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पर वोटिंग का सिर्फ भारत ने नहीं, बल्कि चीन और सऊदी अरब ने भी बहिष्कार किया। रूस ने इस प्रस्ताव पर वीटो का इस्तेमाल किया। इस निंदा प्रस्ताव के पक्ष में 11 और विपक्ष में एक वोट पड़ा। अमेरिका, ब्रिटेन, रूस, चीन और फ्रांस परिषद के स्थायी सदस्य हैं।
