बिहार आर्थिक सर्वेक्षण 2021-22 रिपोर्टः डेढ़ दशक में युवाओं की संख्या बढ़ेगी, बच्चों की घटेगी
पटना
किसी भी देश और राज्य की आबादी में उम्र की संरचना का महत्वपूर्ण आयाम होता है। यही वजह है कि बिहार आर्थिक सर्वेक्षण 2021-22 की रिपोर्ट में आबादी में किस उम्र समूह की कितनी हिस्सेदारी है और आगे इसका क्या अनुमानित स्वरूप होने वाला है, इसका विस्तार से वर्णन किया गया है। देश और बिहार के स्तर पर घटती प्रजनन दर और वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर अनुमानित आबादी और उसमें किस उम्र समूह की कितनी हिस्सेदारी होगी, इसे विस्तार से दर्शाया गया है। रिपोर्ट बताती है कि वर्ष 2036 तक बिहार में 15 से 59 साल के उम्र वालों की अनुमानित संख्या नौ करोड़ 18 लाख होगी। यह उस समय के बिहार की कुल अनुमानित आबादी 14 करोड़ 91 लाख का 61.4 प्रतिशत होगा।
15 साल में प्रजनन दर होगी 2.4 फीसदी
वर्ष 2021 में बिहार की प्रजनन दर 3.2 फीसदी थी, जो वर्ष 2036 तक घटकर 2.4 फीसदी होगी। राष्ट्रीय औसत की बात करें तो यह वर्ष 2021 में 2.1 थी, जो वर्ष 2036 तक घटकर 1.7 होगी। इस तरह देखें तो बिहार की प्रजनन दर में राष्ट्रीय स्तर से अधिक की कमी आएगी।
वर्ष 2021 में बिहार में 15 से 59 साल तक के लोगों की अनुमानित संख्या संख्या 7 करोड़ 23 लाख है। यह संख्या वर्ष 2021 की कुल आबादी 12.46 करोड़ का 58.8 प्रतिशत है। इसी तरह 15 से 59 वर्ष के उम्र वालों की हिस्सेदारी में करीब तीन प्रतिशत का इजाफा वर्ष 2036 तक होगा। राष्ट्रीय स्तर पर इस अवधि में इस आयुवर्ग वालों की कुल आबादी में हिस्सेदारी एक फीसदी से भी कम बढ़ेगी।
