यूक्रेन की रक्षा के लिए नाटो रिस्पांस फोर्स की हो सकती है तैनाती

ब्रसेल्स। रूस यूक्रेन युद्ध ने अमेरिका और खासकर पश्चिमी देशों के लिए बड़ी समस्या खड़ी कर दी है। इन देशों ने ऐसे ही मौके के लिए एक साथ मिलकर उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (NATO) की स्थापना की थी। लेकिन, अबतक चैन की नींद सो रहे इस संगठन के ऊपर अचानक से अपने एक शागिर्द देश को बचाने की जिम्मेदारी आ गई है। यही कारण है कि बेइज्जती से बचने के लिए नाटो ने देर से ही सही, बोलने के बाद अब कुछ करने का फैसला किया है। नाटो ने यूक्रेन की रक्षा के लिए अपनी रिस्पांस फोर्स को एक्टिवेट कर दिया है। नाटो रिस्पांस फोर्स में 30 देशों के बेहतरीन सैनिक तैनात होते हैं। बड़ी बात यह है कि इस रिस्पांस फोर्स में एक सैनिक की तैनाती सिर्फ 12 महीने की ही होती है। यही कारण है कि सभी देशों के चुनिंदा सैनिक पूरी जी-जान लगाकर नाटो में अपनी सर्विस को अंजाम देते हैं। इन सैनिकों को रूस के लिए सीधे तौर पर बड़ा खतरा माना जा रहा है। अगर यह फोर्स यूक्रेनियन राजधानी कीव की सुरक्षा के लिए तैनात की जाती है तो यूक्रेन को बड़ी सैन्य मदद मिल जाएगी। रूस चाहकर भी इस फोर्स से सीधे भिड़ने से पहले 10 बार जरूर सोचेगा, क्योंकि कोई भी एक देश अपने 30 दुश्मन देशों से भिड़ने के बारे में नहीं सोच सकता है।

नाटो रिस्पांस फोर्स क्या है?
नाटो रिस्पांस फोर्स (एनआरएफ) कई मिलिट्री ब्रांच से मिलकर बना हुआ एक इमिडिएट और अर्जेंट टॉस्क फोर्स है। नाटो रिस्पांस फोर्स की पहल 2002 में प्राग शिखर सम्मेलन में की गई थी। इसके एक साल बाद जून 2003 में सदस्य देशों के रक्षा मंत्रियों ने ब्रसेल्स में एनआरएफ के कॉन्सेप्ट को मंजूरी दी थी। अक्टूबर 2004 में रोमानिया के पोयाना ब्रासोव में नाटो के रक्षा मंत्रियों की एक अनौपचारिक बैठक में नाटो महासचिव और और सुप्रीम एलाइड कमांडर यूरोप ने ऐलान किया था कि एनआरएफ इनिशियल ऑपरेशन केपबिलिटिज को पा लिया है। तत्कालीन नाटो सुप्रीम एलाइड कमांडर यूरोप (SACEUR) के जनरल जेम्स जोन्स के शब्दों में नाटो के पास अब शीत युद्ध के लिए जरूरी फोर्स, बड़े पैमाने पर यूनिट्स नहीं होंगी। लेकिन, खुद की सुरक्षा और दोस्तों की मदद के लिए चुस्त और हर मिशन को अंजाम देने वाले सैनिक होंगे। यह फोर्स इस 21वीं सदी में किसी भी खतरे का सामना करने के लिए नाटो को और बेहतरीन तरीके से तैयार करेगी। एनआरएफ जमीनी, हवाई और नौसैनिक यूनिटों का एक अंतरराष्ट्रीय फोर्स भी है, जिसे कम समय में बड़ी घटनाओं के जवाब में प्रतिक्रिया देने के लिए बनाया गया है। इसमें शामिल हुए सैनिक अपनी-अपनी स्किल में माहिर होते हैं। इनके पास हर वो कौशल और तकनीक होती है, जिसमें से शायद ही सभी किसी एक देश के पास मिले।

मल्टी मिशन को अंजाम देने में माहिर है एनआरएफ
इस फोर्स का इस्तेमाल एजुकेशन और ट्रेनिंग के अतिरिक्त मिलिट्री एक्सरसाइज, आपदा के दौरान राहत अभियान और टेक्नोलॉजी के सही उपयोग के लिए भी किया जाता है। इस फोर्स की कमान सुप्रीम अलाइड कमांडर यूरोप (SACEUR) के पास है। एनआरएफ को पिछले साल अफगानिस्तान में भी तैनात किया गया था। इस फोर्स ने काबुल से अमेरिकी सैनिकों और सहयोगी अफगानों को निकालने में काफी सहायता की थी। एनआरएफ रोटेशनल सिस्टम पर बनाया गया एक सैन्य बल है। इसमें तैनात सैनिकों को सिर्फ 12 महीने तक ही सर्विस करनी होती है। जिसके बाद उन्हें संबंधित देश की सेना में वापस भेज दिया जाता है। नॉर्थ अटलांटिक काउंसिल की मंजूरी के बाद इस फोर्स को दुनिया के किसी भी जगह पर तुरंत तैनात किया जा सकता है। एनआरएफ की ऑपरेशनल कमांड का मुख्यालय एक साल नीदरलैंड्स के ब्रंससम और दूसरे साल इटली के नेपल्स में एलाइड ज्वाइंट फोर्स कमांड्स में स्थित होता है।

द वेरी हाई रेडीनेस ज्वाइंट टास्क फोर्स (वीजेटीएफ)
नाटो सहयोगियों ने 2014 के वेल्स शिखर सम्मेलन में नाटो की एनआरएफ को और ज्यादा शक्तिशाली और सक्षम बनाने का फैसला किया, जो न सिर्फ स्किल बल्कि तकनीक के क्षेत्र में भी अग्रणी हो। नाटो रिस्पांस फोर्स के पहले हिस्से द वेरी हाई रेडीनेस ज्वाइंट टास्क फोर्स (वीजेटीएफ) में लगभग 20,000 मजबूत सैनिक शामिल होते हैं। इनमें हवाई, समुद्री और जमीनी सैनिकों का जत्था शामिल होता है। बड़ी बात यह है कि इन सैनिकों को सिर्फ एक से दो दिन के शॉर्ट नोटिस पर कहीं भी तैनात किया जा सकता है।

इनिशियल फॉलो-ऑन फोर्सेज ग्रुप (आईएफएफजी)
इसका दूसरा हिस्सा इनिशियल फॉलो-ऑन फोर्सेज ग्रुप (आईएफएफजी) के नाम से जाना जाता है। यह बहुत प्रशिक्षित फोर्स है। जो संकट के समय वीजेटीएफ के बाद तैनाती के लिए भेजे जाते हैं। ये दो मल्टीनेशनल ब्रिगेड से मिलकर बने होते हैं। इसमें पहला है द मैरीटाइम कंपोनेंट- जिसमें नाटो मैरीटाइम ग्रुप और नाटो माइन काउंटरमेजर्स ग्रुप शामिल होते हैं।

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