खाद्य तेलों में भड़की महंगाई, सोयाबीन तेल छह रुपए किलो हुआ महंगा

ग्वालियर। रूस-यूक्रेन युद्ध से विश्व भर के तेल-तिलहन बाजार में आग लग गई है। अमेरिका, चीन, मलेशिया के बाजार सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गए हैं। निर्यातक देशों में खाद्य तेल के दाम ऊंचे बोले जाने से घरेलू बाजारों में भी इसका असर देखा गया है। गुरुवार को सभी खाद्य तेलों की कीमतों में करीब 5-6 रुपये प्रति किलो की तेजी एक ही दिन में देखने को मिली है। सोया तेल बढ़कर 1510-1520, मूंगफली तेल 1500 रुपये प्रति दस किलो पर पहुंच गया। 23 फरवरी को सोया तेल 1460 और मूंगफली तेल 1450 रुपये था। जब तक युद्ध का माहौल खत्म नहीं होता, बाजार में ऐसे ही तेजी बनी रहने की संभावना है। युद्ध रुकने और सप्लाई सामान्य होने पर ही बाजार में स्थिरता देखने को मिलेगी।

घरेलू तिलहन बढ़ाने के तरीके तलाशने के लिए सरकार की अहम बैठक होने वाली है। इस बीच राज्यों ने अपने स्तर पर तैयारी शुरू कर दी है। गुजरात ने तेल तिलहन पर स्टाक लिमिट लगा दी है। गुजरात सरकार ने खाद्य तेल में खुदरा विक्रेताओं के लिए 40 क्विंटल, थोक के लिए 200 क्विंटल और डिपो के लिए एक हजार क्विंटल जबकि मिल वालों के लिए 90 दिनों के स्टाक के भंडारण की अनुमति दी है। मप्र में मंडियों में सोयाबीन के दाम 7800 तक पहुंच गए हैं।सोयाबीन की आवक देशभर की मंडियों में गुरुवार को करीब 2 लाख 35 हजार बोरी रही। देश में सरसों की आवक भी 6 लाख बोरी के पार पहुंच गई है लेकिन इससे महंगाई पर पानी पड़ता नहीं दिख रहा। प्लांटों के भी सोयाबीन खरीब भाव 7800 तक पहुंच गए हैं। दूसरी ओर सट्टेबाजों ने अब सोयाबीन के दाम 9000 पर जाने के लिए शर्त लगाना शुरू कर दिया है। कपास्या खली में गिरावट रही।

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