संतान की पहली गुरु मां होती है: रामप्रसाद
ग्वालियर। माता ही संतान की प्रथम गुरु होती है उसके सानिगध्य में संतान को उचित संस्कार एवं मार्गदर्शन मिलता है, जिस संतान को माँ की सही शिक्षा मिलती है वो आकाश में 'ध्रुव तारे' की तरह अटल होकर जगमगाती है, जैसे बालक ध्रुव को उनकी सौतेली माँ ने जब उनके पिता की गोद से उतार दिया था तो उनकी माँ सुनीति ने उन्हें ज्ञान दिया कि बैठना है तो परम पिता परमात्मा नारायण की गोद में बैठो, मांगना है तो परमपिता परमात्मा से मांगों जिसे मानकर बालक ध्रुव ने जंगल में जाकर नारायण की कठिन तपस्या की एवं भगवान ने उन्हें दर्शन देकर आसमान में हमेशा अटल रहकर जगमग रहने का आशीर्वाद दिया- उक्त विचार अंतराष्ट्रीय रामस्नेही सम्प्रदाय के संत एवं मूर्धन्य विद्वान बड़ोदा से पधारे श्री रामप्रसादजी महाराज ने लक्ष्मीगंज स्थित रामद्वारा में चल रहे 7 दिवसीय श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञान महायज्ञ में दूसरे दिन शुक्रवार को ध्रुव चरित्र का प्रसंग सुनाते हुए व्यक्त किये। संतजी ने आगे कथा सुनाते हुए कहा कि आज के मातापिता को अपनी संतान को संस्कार प्रदान करना चाहिए न कि धन संपदा।
कथा का समय सुबह 9 बजे से 12 बजे तक रखा गया है।
