छोटे ठेकेदारों की सक्रियता से बढ़ी लिकर सिंडीकेट की टेंशन

ग्वालियर। नई आबकारी नीति के तहत वित्तीय वर्ष 2022-23 के लिए शराब दुकानों की आॅनलाइन नीलामी प्रक्रिया जारी है। शराब दुकानों के छोटे ग्रुप हो गए हैं,इसलिए अब नए लोग भी ठेका लेने सामने आा रहे। लिकर सिंडीकेट के सिस्टम में हावी रहने से पिछले दो साल से शराब कारोबार से दूर रहने वाले छोटे ठेकेदार इस बार सक्रिय दिखाई दे रहे हैं। इससे लिकर सिंडीकेट की टेंशन बढ़ी हुई है।

जानकारी के अनुसार ज्यादा बिक्री वाली दुकानें हाथ से न निकल जाएं,इसलिए सिंडीकेट के ठेकेदारों को अब मजबूरी में टेंडर डालना पड़ रहे। सिडीकेट के ठेकेदार आबकारी अफसरों से इस बार घाटे का रोना नहीं रो रहे। कमाई वाली दुकानों को छोड़ना नहीं चाहते। ऐसे ठेकों को लेने महंगी कीमत टेंडर में भरी जा रही। वहीं छोटे ठेकेदारों ने भी कमाई वाली दुकानों को लेने पूरा जोर लगाया हुआ। इस प्रतिस्पर्धा का सीधा फायदा शासन को हो रहा है। ठेका महंगा उठने से राजस्व अधिक प्राप्त हो रहा है।

बता दें कि  प्रदेश में बड़े जिलों की सारी शराब दुकानों पर दो साल से लिकर सिंडीकेड का कब्जा था। कांग्रेस सरकार के समय अपने हिसाब से आबकारी नीति तैयार कराकर सिंडीकेट ने ऐसा किया। इनकी मोनोपॉली की वजह से प्रदेश भर में मनमाने दामों में शराब बिक्री की गई। इस कारण सस्त के के चक्कर में लोगों ने अवैध शराब खरीदकर सेवन किया। जहरीली अवैध शराब से कई लोगों की प्रदेश में जान चली गई। लिकर सिंडीकेड की कमर तोड़ने के लिए बीजेपी सरकार ने आबकारी पॉलिसी बदली और शराब दुकानों को छोटे-छोटे ग्रुपों में तब्दील कराया।

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