सिद्धार्थ गुजरात की यूनिवर्सिटी में शेयर करेंगे सफलता की कहानी

रायपुर
शहर के युवा सिद्धार्थ सुबोध पांडे को अपनी सफलता की कहानी शेयर करने हेतु गुजरात की यूनिवर्सिटी में आमंत्रण मिला है। सिद्धार्थ ने मास्टर आॅफ सोश्यल वर्क की पढ़ाई गुजरात के वडोदरा शहर से नवरचना यूनिवर्सिटी से की है। पढ़ाई पूरी करने के साथ ही केम्पस सलेक्शन में उन्हें दीपक नाइट्रेट के दीपक फाउंडेशन में नोकरी मिली। कोरोना संकट के समय वापस रायपुर पहुँच कर सिद्धार्थ ने सोश्यल एंटरप्रेन्योर के रूप में काम आरम्भ किया।

सिद्धार्थ ने आदिवासी अंचल में काम करने की ठानी और आज बस्तर अंचल में वनोपज के वेल्यू एडिशन पर काम कर रहे है। विशेष तौर पर महिला स्व सहायता समूहों को उनके द्वारा एकत्र किए गए वनोपज का उचित मूल्य दिलवाने के प्रयास किये। वनोपज के वेल्यू एडिशन से क्वालिटी कंट्रोल के साथ उत्पाद तैयार करवाने से लेकर ब्रांडिंग, मार्केटिंग अपनी कम्पनी सोश्यल ट्रेन के माध्यम से कर रहे हैं।सिद्धार्थ का मानना है कि छत्तीसगढ़ के ट्रडिशनल और होम मेड प्रोडक्ट्स यदि क्वालिटी मेंटेन करते हुए तकनीकी तरीके से बनाई जाए तो उसको बाजार में अच्छा रिस्पॉन्स मिलता है, आज ट्रेंड बदल चुका है। मिलावट से बचने के लिए उपभोक्ता हैंडमेड प्रोडक्ट्स को प्राथमिकता देते है। सिद्धार्थ का कहना है कि उनकी कम्पनी सामाजिक जिम्मेदारी के साथ व्यवसाय कर रही है। लोगों का स्वास्थ उनकी पहली प्राथमिकता है। इसलिए वो अपने सभी प्रोडक्ट्स में मसाले तेल उत्तम क्वालिटी का प्रयुक्त करते है। उन्होंने एक प्रश्न के उत्तर में बताया कि हल्दी,लाल मिर्च पावडर, धनिया पावडर शुद्धता के साथ महिला स्व सहायता समूह द्वारा स्वयम पीसकर तैयार किये जाते है और तेल हेल्थगार्ड राइसब्रान का उपयोग करते है जिसमे ओरिज?ोल की मात्रा बहुत अधिक होती है। मिलेट के प्रोडक्ट्स बढ़ावा देना इनकी प्राथमिकता है। सिद्धार्थ अपने बराबर के विद्यार्थियों के बीच एक मिसाल के रूप में उभर कर आये है। सिद्धार्थ का मानना है कि हमे नोकरी देने वाला बनना चाहिए, और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों की ओर पहले ध्यान देना चाहिए जिससे स्थानीय लोगो का जीवन स्तर ऊपर उठाने में हम अपना योगदान दे सकें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *