शनिदेव को चढ़ने वाले तेल की नीलामी, बोली लग रही करोड़ों में
आगरा
आज शनिवार है। शनिदेव का दिन। मान्यता है कि आज के दिन शनिदेव को सरसों का तेल अर्पित किया जाता है। लगभग हर शहर में छोटे बड़े शनिदेव के कई मंदिर हैं। जहां सुबह और शाम को तेल चढ़ाने वाले श्रद्धालुओं की लंबी कतार लगी नजर आएगी। बहुतों के मन में ये सवाल उठता होगा कि भगवान पर चढ़ाए गए इस तेल का आखिर होता क्या होगा। दरअसल ऐसे मंदिर, जहां की मान्यता अधिक है और तेल भी अधिक मात्रा में चढ़ाया जाता है, वहां इस तेल को लेने के लिए सालभर का ठेका उठाया जाता है। ठेका उठाने वाला व्यक्ति बाद में उस तेल का चाहें तो करे, ये उस पर निर्भर है। इन ठेकों का लेने के लिए करोड़ों रुपये की बोली लगती है।
कोकिलावन में शनिधाम मंदिर पर ठेका लेने के लिए जुटे लोग
इसका एक उदाहरण है मथुरा का प्रसिद्ध शनिधाम मंदिर। शनिधाम मंदिर की दुकानों और तेल के ठेके को लेकर अभी गुरुवार को कई घंटे लंबी बैठक हुई। तेल का ठेका पांच करोड़ और दुकानों की बोली 15 करोड़ रुपये लगी। हालांकि बाद में नीलामी स्थगित कर दी गई। अब बीस दिसंबर को फिर से नीलामी होगी। कोकिनावन स्थित शनिधाम मंदिर परिसर में कोरोना काल के चलते दो वर्ष से दुकानों की नीलामी नहीं हुई है। वहीं शनि महाराज पर अभिषेक के बाद निकलने वाले तेल, कंठी माला का ठेका भी नहीं हो सका। गुरुवार को नीलामी को लेकर मंदिर परिसर में बैठक हुई। यहां पर तेल का ठेके लेने के लिए बोली पांच करोड़ रुपये लगी। मंदिर परिसर में 17 दुकानें हैं। इनमें पूजा सामग्री, खानपान की सामग्री की बिक्री होती है। इसकी बोली 15 करोड़ रुपये तक पहुंची। इसे लेकर सहमति नहीं बन सकी। आरोप लगा कि अनर्गल तरीके से बोली लगाई जा रही है। इसलिए इसे फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। मंदिर के लेखाधिकारी निरंजन शर्मा ने बताया कि बोली स्थगित कर दी गई है। अब दुकानों के लिए बोली 20 दिसंबर को लगाई जा सकेगी। उन्होंने बताया कि बोली लगाने के लिए बैठक होगी और इसके बाद 20 दिसंबर की तारीख तय की जाएगी। इस बार भी बोली की काफी ऊंची उठने की संभावना है। बताते चलें कि शनिधाम मंदिर में हर शनिवार को हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। इसमें उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों के अलावा दिल्ली एनसीआर और हरियाणा के श्रद्धालु शामिल होते हैं।
मंदिर के आसपास की दुकानों के लिए मारामारी
तेल का ठेका तो अलग बात है। असली लड़ाई होती है मंदिर के आसपास की दुकानों की नीलामी को लेकर। मंदिर के नजदीक होने वाली दुकानों की बोली करोड़ों में पहुंचती है। दरअसल दुकान जितनी नजदीक होगी, वहां से श्रद्धालुओं के प्रसाद लेने की संभावना उतनी ही ज्यादा रहेगी।
