अब परफारमेंस पर जुबानी घमासान

जबलपुर। बयानों पर केंद्रित होती जा रही राजनीति को मोदी-2 के दूसरे बर्थडे के रूप में नया विषय मिल गया है। भाजपा-कांग्रेस के नेता इस विषय का ेलेकर खूब बयान बाजी कर रहे हैं। भाजपाई जहां सरकार की उपलब्धियों की बात कर रहे हैं, तो वहीं कांग्रेस बीते सात सालों की शासन व्यवस्था को सबसे कमजोर बता रही है। दिल्ली-भोपाल के बड़े नेताओं के बीच जुबानी जंग जारी है ही, लोकल स्तर पर भी दोनों पार्टियों के नेता आक्रमक हैं।

पिछड़ गया देश
केंद्र की भाजपा सरकार के सात साल पूरे होने पर कांग्रेस हमलावर है। नगर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष दिनेश यादव ने कहा कि इन सात साल का कार्यकाल पूरा होने पर देश को आखिर क्या मिला और क्या नहीं मिला इस पर चर्चा की जाना चाहिए। ऐसा इसलिए जरुरी है क्योंकि मोदी सरकार ने जनता को जो उम्मीद जगाई थीं और सपने दिखाए हैं वे पूरे नहीं हुए। न काला धन आयाा, न युवाओं को प्रतिवर्ष दो करोड़ रोजगार मिला। न किसानों की आय दोगुनी हुई न महंगाई घटी, रुपया डॉलर के बराबर भी नहीं हुआ। उल्टे महंगाई चरम पर है।

भाजपा के अपने दावे
उधर भाजपा का कहना है कि बीते सात सालों में जो हुआ, वो उससे पहले के कांग्रेसी शासन में कभी नहीं हुआ। सरकार ने कोविड-19 की वैश्विक समस्या को बड़ी समझदारी से निपटा। बातें करना आसान है, काम करना मुश्किल। भाजपा नगर अध्यक्ष जीएस ठाकुर ने कहा कि जनता की जरूरतों के हिसाब से काफी कुछ किया गया। हां, बहुत से कम होने अभी बाकी है, जो आने वाले समय में हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि लगातार लंबे समय तक यदि कचरा फैलाया जाय, तो उसे साफ करने में समय लगता है।

जनता भी कर रही समीक्षा
 सियासी नफे नुकसान से अलग देखें, तो आम जनता भी सरकार के कामों की समीक्षा कर रही है। वो राष्टÑीय अंतरर्राष्टÑीय मामलों पर सरकार की नीति पर नजर जमाए रखने के साथ ही जनहित के आधार पर भी समीक्षा कर रही है। महंगाई-बेरोजगारी, शिक्षा-स्वास्थ्य पर क्या हुआ इसको लेकर आपी चर्चाएं होती हैं। पेट्रोल-डीजल के सौ रुपए पार होने, किसानों के छह महीने से लगातार चलने वाले आंंदोलन, स्वास्थ्य सुविधाआें आदि पर भी जनता बातें करने लगी है।

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