लखनऊ की इन 3 ऐतिहासिक झीलों का पानी हुआ जहरीला, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने चेताया
लखनऊ
राजधानी लखनऊ की तीन ऐतिहासिक और प्रमुख झीलों का पानी जहरीला और दमघोंटू हो चुका है। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम की जांच में यमुना झील, मोतीझील, विनायक झील और बटलर पैलेस झील के पानी में सीवर, कूड़ा, घास और जहरीला ठोस मलबा मिला है। बोर्ड ने इसे गंभीरता से लेते हुए नगर निगम, एलडीए को पत्र लिख झीलों का अस्तित्व बचाने को कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।
बोर्ड के सहायक वैज्ञानिक अधिकारी क्षितिश पटेल, वैज्ञानिक सहायक रज्जन त्रिपाठी, प्रयोगशाला सहायक नीमेष दुबे ने 21 से 23 मार्च 2022 के बीच तीनों झीलों का सर्वे कर पानी की जांच की। इसमें उन्हें झीलों की स्थिति बेहद खराब मिली है। इनमें पानी की जगह सीवर, कचरा, मलबा, घास और ठोस कूड़ा मिला। झील का पानी पूरी तरह काला और जलीय जीवों के लिए दम घोंटू है। रिपोर्ट पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अफसरों ने इस स्थिति पर चिंता जताई है। क्षेत्रीय अधिकारी रामकरण ने बीती 24 मार्च को एलडीए उपाध्यक्ष को पत्र लिख कर झीलों की बदहाली बताई है। क्षेत्रीय अधिकारी की रिपोर्ट के मुताबिक तीनों झीलों में सीवर का गंदा पानी आ रहा है। सबसे खराब स्थिति यमुना झील-मोती झील और विनायक झील की मिली है।
सीवर, मलबे से भरी हैं मोती और यमुना झील
मोतीझील यमुना झील के आसपास रिहायशी कॉलोनियां बनी हैं। पूरा सीवर झील में भर रहा है। नगर निगम की नाली-नाले मोतीझील में निस्तारित मिले। झील के पास श्मशान घाट, कब्रिस्तान है। यहां का अपशिष्ट भी झील में डाला जाता है। झील के 70 हिस्से में सीवर और स्लज भरा मिला है।
