जनरल ड्यूटी में परिवर्तन का पिछले 6 साल से इंतजार कर रहे ट्रेडमैन आरक्षक
भोपाल। प्रदेश पुलिस में दो हजार से ज्यादा ट्रेडमेन संवर्ग के आरक्षक जीडी (जनरल ड्यूटी) में परिवर्तन का पिछले 6 साल से इंतजार कर रहे हैं। इसे लेकर डीजीपी भी अफसरों की पिछले साल समिति बना चुके हैं, इस समिति को सात दिन के भीतर रिपोर्ट देने के भी निर्देश दिए गए, रिपोर्ट भी लगभग एक साल पहले पेश हो चुकी, लेकिन अब तक शासन स्तर पर इसे लेकर कोई फैसला नहीं हो सका। इधर पांच साल बाद हो रही पुलिस आरक्षकों की भर्ती में ट्रेडमेन की भर्ती इसलिए नहीं की जा रही है कि वे पुलिस मुख्यालय की प्राथमिकता में नहीं हैं।
जानकारी के अनुसार ट्रेडमेन आरक्षकों का जीडी में परिवर्तन पर रोक तत्कालीन डीजीपी नंदन दुबे ने वर्ष 2012 में लगा दी थी। इसके बाद इस संवर्ग के जवानों ने अपनी मांग सरकार के पास तक पहुंचाई। नतीजे में वर्ष 2016 में पुलिस मुख्यालय ने गृह विभाग को इस संबंध में प्रस्ताव भेजा। जिसमें फिर से ट्रेडमेन आरक्षक संवर्ग को अपनी नौकरी के पांच साल बाद डीजी में परिवर्तन किया जा सके। तब से लेकर अब तक यह प्रस्ताव लंबित है। पहले इस संवर्ग के आरक्षकों को पांच साल बाद जीडी में ले लिया जाता था, लेकिन इस रोक के बाद से अब उन्हें जीडी में नहीं लिया जाता है। पदोन्नति के बाद भी उनसे यही काम करवाया जाता है।
6 हजार की भर्ती में नहीं ट्रैडमेन
इधर प्रदेश में पुलिस आरक्षकों की भर्ती में इस बार ट्रेडमेन की भर्ती नहीं की जा रही है। इस भर्ती में सिर्फ जिला बल और बटालियनों के लिए ही आरक्षक की भर्ती की जा रही है। इस वर्ष 6 हजार आरक्षकों की भर्ती पुलिस में होने जा रही है। हाल ही में व्यापमं के जरिए इनकी परीक्षा हो चुकी है।
डीजीपी ने बनाई थी समिति
इस संबंध में पिछले साल डीजीपी विवेक जौहरी ने अफसरों की एक समिति बनाई। इस समिति का अध्यक्ष आईजी प्रशासन को बनाया गया था। जबकि सदस्य डीआईजी एसएएफ, एआईजी विशेष शाखा और एआईजी प्रशासन को बनाया गया। समिति का गठन 15 जनवरी 2021 को किया गया था। डीजीपी ने निर्देश दिए थे कि इस संबंध में एक सप्ताह के अंदर रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। रिपोर्ट भी करीब एक साल पहले प्रस्तुत हो गई थी, लेकिन इस पर निर्णय अब तक नहीं लिया गया।
डीजीपी से आरआई तक के यहां पदस्थ हैं
ट्रैडमेन आरक्षक संवर्ग के जवान डीजीपी से लेकर आरआई (रक्षित निरीक्षक) के यहां पर पदस्थ हैं। इसमें आरक्षक से पदोन्नति होने के बाद भी प्रधान आरक्षक और सहायक उपनिरीक्षक भी इन सभी अफसरों की सेवा में तैनात रहते हैं। इस संवर्ग में ड्राइवर, नाई, धोबी, कुक, वाटर कैरियर, टेंट खलासी आदि शामिल होते हैं।
