अंतरराष्ट्रीय सस्टेनेबल अवॉर्ड की दौड़ में भी शामिल सोलर प्लांट असुरक्षित

सागर

 जंक्शन पर रेल इंजन को चलाने वाला देश का पहला सोलर एनर्जी प्लांट रेलवे ने बीएचइएल के सहयोग से स्थापित किया है, जो अंतरराष्ट्रीय सस्टेनेबल रेलवे अवॉर्ड की दौड़ में भी शामिल है, लेकिन इसकी सुरक्षा सही मानकों पर नहीं की जा रही है, यही कारण है कि असामाजिक तत्वों ने कुछ पैनल को तोड़ दिया दिया है। दरअसल रेलवे ने पूर्वी कॉलोनी में बीएचइएल के सहयोग से 1.7 मेगावॉट का सौर ऊर्जा प्लांट तैयार किया गया है। यह देश में पहला ऐसा प्लांट है, जहां से सोलर एनर्जी से 25 केवी ओवरहेड लाइन से जोडक़र इंजन को दौड़ाया जा रहा है। प्लांट की सालाना उत्पादन क्षमता 25 लाख यूनिट है, जिससे एक साल में करीब 1.37 करोड़ रुपए की बचत रेलवे कर रही है। लेकिन इस प्लांट की सुरक्षा के लिए भेल ने बनाते समय कुछ कमी छोड़ दी हैं, जिसके कारण सोलर पैनल को लोग नुकसान पहुंचा रहे हैं। यह प्लांट शहर के बीचों में बीच स्थित है, जहां पर आसपास कई लोगों के मकान भी है। इतना ही नहीं यह जगह फूलबाग स्टेडियम के नाम से भी जानी जाती है, जहां पर शाम होते ही असामाजिक तत्वों का भी जमाबड़ा होने लगता है। यहां पर प्लांट को सुरक्षित करने के लिए लगी सुरक्षा जाली भी करीब सात फिट ऊंची हैं, जिसके कारण लोग वहां पत्थर आदि फेंककर पैनल को नुकसान पहुंचा रहे हैं। यहां सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम किए जाएं। एक पैनल क्षतिग्रस्त होने हजारों रुपए का नुकसान होगा।

अंतरराष्ट्रीय अवॉर्ड की दौड़ में शामिल है प्लांट
यह सोलर एनर्जी प्लांट और उससे संबंधित मिशन विद्युतीकरण को प्रमुख वैश्विक पुरस्कारों की दौड़ में शामिल किया गया है। विभिन्न देशों की रेलवे से जुड़ी पेरिस में स्थित यूआइसी इंटरनेशनल यूनियन ऑफ रेलवे संस्था सस्टेनेबल रेलवे अवॉर्ड प्रदान करती है। पुरस्कार वितरण समारोह 22 जून को बर्लिन में होना प्रस्तावित है।

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