जबलपुर आइटी पार्क में आवंटित जमीन पर निजी कालेज का दावा

जबलपुर
 आइटी पार्क में प्रोजेक्ट लगाने के लिए निवेशकों ने यहां जमीन ली। मध्यप्रदेश इलेक्ट्रानिक्स डेवलपमेंट कार्पोरेशन लिमिटेड (एमपीईडीसीएल) ने निवेशकों को जमीन की रजिस्ट्री भी कर दी। लेकिन निवेशक जब अपनी जमीन पर भौतिक कब्जा करने आइटी पार्क पहुंचे तो यहां विवाद खड़ा हो गया। विवाद की वजह यह थी कि निवेशकों को जो जमीन आवंटित की गई, उस पर ज्ञानगंगा इंजीनियरिंग कालेज ने अपना दावा किया। मामला मध्यप्रदेश के आइटी मंत्री से लेकर जिला प्रशासन के पास पहुंचे। मौके पर जाकर राजस्व विभाग ने दोनों पक्षों के दस्तावेजों को जांच शुरू कर दी। वर्तमान स्थिति यह है कि पिछले कई माह से निवेशक अपनी जमीन लेने के लिए परेशान हो रहे हैं। कभी उन्हें राजस्व विभाग की रिपोर्ट आने का इंतजार करने कहा जाता है तो कभी उन्हें दूसरी जगह पर जमीन आवंटित करने की बात कहकर शांत करा दिया जा रहा है।

 

एमपीईडीसीएल के काम पर उठे सवाल : नयागांव में लगभग 62 एकड़ में बन रहे आइटी पार्क में पहले फेज का काम पूरा हो गया है। दूसरे फेज में सड़क-नाली, बिजली का काम चल रहा है। एमपीईडीसीएल का दावा है कि आइटी पार्क में जमीन लेने वाले जिन 10 निवेशकों की जमीन पर ज्ञानगंगा इंजीनियरिंग दावा कर रहा है, वह गलत है। मामले की जांच राजस्व विभाग को सौंपी गई है। जहां तक निवेशकों को जमीन का भौतिक कब्जा न मिलने की बात है तो जरूरत पड़ी तो उन्हें दूसरी जगह जमीन दे दी जाएगी। अब एमपीईडीसीएल पर ही सवाल खड़ा हो गया है कि जमीन विवादित थी तो एमपीईडीसीएल ने निवेशकों को रजिस्ट्री कैसे कर दी।

कहां हुई गड़बड़ी : मामले की जांच करने पर पता चला कि नया गांव में नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण की लगभग 62 एकड़ जमीन आइटी पार्क के लिए प्रस्तावित हुई। जिला प्रशासन ने यह जमीन एमपीईडीसीएल को हस्तांतरित कर दी। सूत्रों के मुताबिक प्रस्तावित नक्शा बनाया गया। राजस्व विभाग ने भौतिक परीक्षण के बाद संशोधित नक्शा एमपीईडीसीएल को दिया, लेकिन एमपीईडीसीएल ने निर्माण कर रही हाउसिंग बोर्ड की प्रस्तावित नक्शा दे दिया, जिसके आधार पर निर्माण कार्य कराया जा रहा है। यहीं से विवाद खड़ा हुआ। हालांकि इस मामले में राजस्व विभाग ने अपनी जांच पूरी कर ली है और जल्द ही वह अपनी रिपोर्ट कलेक्टर को सौंप देंगी।

 

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