चंदू की गिरफ्तारी को लेकर पुलिस का रूख नरम क्यूं?

राजनांदगांव
खुज्जी विधायक छन्नी साहू के आरोपी पति चंदू साहू के खिलाफ आदिवासी समाज के युवा वाहन चालक को अश्लील गालियां देना अंतत: चंदू साहू को महगा पड़ा और छूरिया पुलिस ने शून्य में अपराध कायम कर अग्रिम कारवाही हेतु अजाक थाना राजनांदगांव में मामले को स्थानांतरण किया जहां मामले में लगे आरोपों को सही पाते हुए अजाक थानें ने अपराध क्रमांक 09/2021 एक्ट्रोसिटी एक्ट के तहत अपराध पंजीबद्ध कर लिया गया उक्त मामले में अब तक आरोपी चंदू साहू की गिरफ्तारी पुलिस नही कर पाई है। एक्टोसिटी एक्ट के आरोप में खुज्जी की विधायक छन्नी साहू के पति चंदू साहू जहां खुलेआम राजनांदगांव की सड़कों पर और सरकारी कार्यक्रमों में नजर आ रहा है वहीं पुलिस एक्ट्रोसिटी के मामले में गिरफ्तार करने के मूड में दिखाई नजर नहीं आ रही है। पुलिस अधीक्षक कार्यालय में आरोपी चंदू साहू बाकायदा चंद पत्रकारों से रूबरू होकर बाकायदा बयान बाजी कर रहे है।  वहीं पुलिस के आला अधिकारी हाथ पे हाथ धरे बैठे नजर आए।आखिर क्या वजह है जिसमे गिरफ्तारी को लेकर पुलिस बेबस व लाचार नजर आ रही है स्कॉटलैंड की पुलिस को पीछे छोड?े वाली राजनांदगांव पुलिस आरोपी के सामने उल्टा सरेंडर नजर आ रही है। गिरफ्तारी को लेकर छुरिया पुलिस अजाक थानें का मुंह ताक रही है और जिले के आला पुलिस अधिकारी कल विधायक छन्नी साहू और उसके आरोपी पति की आव भगत में लगे रहे।

वही छत्तीसगढ़ प्रदेश के मुख्यमंत्री अपने पिता की गिरफ्तारी पर भी गुरेज नहीं करते ताकि कानून और व्यवस्था पर आम लोगों का भरोसा कायम हो सके लेकिन मुख्यमंत्री की मंशा से उलट राजनांदगांव पुलिस का रवैया समझ से परे है। दरअसल, एससी/एसटी एक्ट में संशोधन के जरिए शिकायत मिलने पर तुरंत गिरफ्तारी का प्रावधान फिर से जोड़ा गया था। कोर्ट में दायर याचिका में इस संशोधन को अवैध करार देने की मांग की गई थी। क्योंकि, मार्च 2018 में कोर्ट ने तुरंत गिरफ्तारी पर रोक लगाने वाला फैसला दिया था। कोर्ट ने कहा था कि कानून के दुरुपयोग के बढ़ते मामलों के मद्देनजर शिकायतों की शुरूआती जांच के बाद ही पुलिस को कोई कदम उठाना चाहिए। इस फैसले के व्यापक विरोध के चलते सरकार को कानून में बदलाव कर तुरंत गिरफ्तारी का प्रावधान दोबारा जोड?ा पड़ा था। सरकार की दलील है कि अनुसूचित जातियों के लोग अब भी सामाजिक रूप से कमजोर स्थिति में हैं। उनके लिए विशेष कानून जरूरी है।
 

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