महत्त्वाकांक्षी ‘केन-बेतवा लिंक परियोजना’ से चमकेगा बुंदेलखंड

भोपाल

भारत में नदियों का अत्यधिक महत्व है। इन ही महत्वपूर्ण नदियों में से हैं 'केन और बेतवा'। केन और बेतवा दोनों नदियों का उद्गम स्थल मध्यप्रदेश है। यह यमुना नदी की सहायक नदियाँ कहलाती हैं। इन दोनों नदियों का क्षेत्र देश के दो राज्य- मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश में पाया जाता है। यही कारण है कि नदी जोड़ो परियोजना के अंतर्गत मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश की राज्य सरकारें इन नदियों को आपस में जोड़ने के लिए योजनाबद्ध तरीके से काम करने को तैयार हैं।

इस दिशा में पहला पड़ाव था, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री, मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्रियों के बीच देश में पहली बार, 22 मार्च 2021 को केन – बेतवा परियोजना को लागू करने के लिए एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर । यह समझौता पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी के दृष्टिकोण को लागू करने के लिए अंतर-राज्य सहयोग की शुरुआत करने के लिए किया गया था। दूसरा और सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव रहा जब केन -बेतवा लिंक परियोजना को बुधवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल से स्वीकृति मिली। इससे  दोनों राज्यों में फैले बुंदेलखंड क्षेत्र में  विकास की एक नई उम्मीद जाग गई है।

'केन -बेतवा परियोजना', नदियों को आपस में जोड़ने के लिये राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य योजना (National Perspective Plan) की पहली महत्त्वाकांक्षी परियोजना है। मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश राज्यों की सरकारों द्वारा इस पर फिरसे कई वर्षों से अमल की जाने की कोशिश की जा रही है। इस परियोजना का उद्देश्य उत्तर प्रदेश के सूखाग्रस्त बुंदेलखंड क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के लिए मध्यप्रदेश की केन नदी के अधिशेष जल को बेतवा नदी में हस्तांतरित करना है।

केंद्रीय कैबिनेट की मंज़ूरी मिलने के बाद केन -बेतवा परियोजना को क्रियान्वित करने का रास्ता अब सशक्त हो चुका है। जहां अब केंद्र सरकार ने इसकी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट बनाकर तैयार कर ली है। इसके बाद अब बुंदेलखंड क्षेत्र में इसका लाभ सभी लोगों को मिल सकेगा। पानी की कमी से जूझ रहे बुंदेलखंड क्षेत्र में अब खुशहाली की उम्मीद की जा सकेगी। केन बेतवा परियोजना की लागत 44 लाख 605 करोड़ रुपये है। इस परियोजना से जहां मध्यप्रदेश के छतरपुर, टीकमगढ़, पन्ना, सागर, दमोह और दतिया ज़िलों में पानी की कमी दूर होगी, वहीं उत्तर प्रदेश के बांदा, महोबा, झांसी और ललितपुर ज़िलों में सिंचाई की सुविधा मिल सकेगी। इसके अतिरिक्त मध्यप्रदेश के विदिशा, शिवपुरी और रायसेन ज़िलों में, इस परियोजना से करीब 62 लाख लोगों को पेयजल भी उपलब्ध करवाया जा सकेगा।

इस परियोजना के सन्दर्भ में दो बातें महत्वपूर्ण हैं। पहली, इस परियोजना के लागू होने से बुंदेलखंड क्षेत्र को भरपूर फायदे मिलेंगे जैसे सूखे की स्थिति में कमी, बिजली उत्पादन में वृद्धि, कृषि उत्थान, किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त जल, और जैव विविधता का जीर्णोद्धार इत्यादि। दूसरी, केंद्र सरकार ने सभी राजनैतिक मतभेदों को पृथक रखकर यह निर्णय लिया है। यही नहीं, सरकार ने इस परियोजना के सफल क्रियान्वयन के लिए पर्यावरणीय घटकों को भी ध्यान में रखा है, जिससे वन संपदा को किसी भी प्रकार की क्षति न पहुँचे।

इस परियोजना का सबसे बड़ा अनुकूल प्रभाव किसानों पर पड़ने की उम्मीद है। इससे न सिर्फ बुंदेलखंड क्षेत्र के किसानों को सिंचाई के स्थायी साधन प्रदान किये जा सकेंगे बल्कि भूजल पर अत्यधिक निर्भरता को कम करके किसानों के लिए स्थायी आजीविका भी सुनिश्चित की जा सकेगी। इस बहुउद्देशीय परियोजना के क्रियान्वयन से न केवल जल संरक्षण में तेज़ी आएगी, बल्कि 103 मेगावाट जल-विद्युत का उत्पादन भी सुनिश्चित किया जा सकेगा। कुछ विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि पन्ना टाइगर रिज़र्व के जल संकट वाले क्षेत्रों में बांधों का निर्माण होने से पन्ना रिज़र्व के जंगलों का जीर्णोद्धार किया जा सकेगा,और ऐसा होने पर इस क्षेत्र में जैव विविधता समृद्ध हो सकेगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने जहां केन- बेतवा परियोजना को मंजूरी देकर बुंदेलखंड क्षेत्र के विकास के नए दरवाजे खोल दिए हैं, वहीं भारत के कदम आत्मनिर्भर भारत की ओर भी एक कदम प्रशस्त किया गया हैं। कुल 44 हज़ार ,605 करोड़ रुपये की इस परियोजना में  39 हज़ार 317 करोड़ रुपये का  केंद्रीय समर्थन मिलेगा , जिसमें  36 हज़ार 290 करोड़ रुपये का अनुदान और 3,027 करोड़ रुपये का ऋण शामिल है। इस परियोजना के क्रियान्वयन में अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी का उपयोग किया जाएगा, जो आने वाले 8 वर्षों की अवधि में बुंदेलखंड के वर्तमान रूप को बदलकर एक खुशहाल क्षेत्र का रूप प्रदान करेगा।

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