बेटे को अस्‍पताल में छोड़ भाग गया पिता, डॉक्‍टरों ने इलाज के बाद 15 की उम्र में कराया कक्षा एक में दाखिला

लखनऊ
लखनऊ के बलरामपुर अस्पताल के डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी दीपक के लिए किसी मसीहा से कम नहीं। डेढ़ साल पहले पिता द्वारा अस्पताल में भर्ती कराकर भाग जाने के बाद दीपक की अस्पताल में सभी ने अपने बच्चे की तरह देखभाल की। कपड़े और भोजन दिए। दीपक के ठीक होने के बाद यहां के हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. जीपी गुप्ता ने चाइल्डलाइन की मदद से उसे नाका के श्रीमद दयानंद बाल सदन में दाखिल कराया। 15 साल की उम्र में पहली बार कक्षा एक में दाखिला पाकर और नए दोस्तों के साथ वह बेहद खुश है।

कुपोषण से हड्डियां कमजोर हो गईं
हरदोई के नन्नापुरवा निवासी दीपक की मां बचपन में गुजर गई। पिता सुरेंद्र ने कभी ख्याल नहीं रखा। भरपेट भोजन नहीं दिया। 12 साल की उम्र में दीपक कुपोषण का शिकार हो गया। पैर की हड्डियां टेढ़ी हो गईं। कमर झुक गई। जिसके बाद पिता ने उसे बलरामपुर अस्पताल में भर्ती कराया। लेकिन कुछ दिन बाद ही पिता बलरामपुर अस्पताल की इमरजेंसी में दीपक को भर्ती कराकर भाग गया। अस्पताल के हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. जीपी गुप्ता और स्वास्थ्य कर्मियों ने इलाज कर दीपक को नया जीवन दिया है।

लिखने-पढ़ने से खुश दिख रहा मासूम
श्रीमद दयानंद बाल सदन के मंत्री अजय प्रकाश बताते हैं कि दीपक स्वस्थ है। स्कूल न जाने की वजह से दीपक को लिखना और पढ़ना नहीं आता है। अब उसे अक्षरों व संख्या की पहचान करनी बतायी जा रही है। यहां पढ़ रहे दूसरे बच्चों की मदद से दीपक सीख रहा है। उसे कक्षा एक में दाखिल दिया गया है। 54 बच्चों के साथ रहकर व पढ़ाई कर वह बहुत खुश है। ध्यान और योग भी नियमित कर रहा है। अजय ने बताया कि दीपक के पिता के बारे में पड़ताल की लेकिन कुछ पता नहीं चल पा रहा है।

 

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