मुख्यमंत्री शिवराज ने कहा कि मध्यप्रदेश की ब्यूरोक्रेसी निवेशकों को करती है सहयोग
भोपाल
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि मध्यप्रदेश की ब्यूरोक्रेसी निवेशकों को सहयोग करने वाली है। हमारे अफसर इसके लिए टाइम लाइन पॉलिसी पर काम करते हैं और हमने इसके लिए स्टार्ट योर बिजनेस इन थर्टी डेज शुरू कर रखा है।
निवेश को बढ़ावा देने के लिए देश भर के निवेशकों को वे न्यौता देते हैं कि एमपी में आएं और निवेश के लिए स्थान का चयन कर उद्यम लगाएं। सीएम चौहान ने ये बातें नई दिल्ली में पीएचडी चैम्बर आॅफ कॉमर्स द्वारा आयोजित स्टेट्स पॉलिसी कान्क्लेव को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये संबोधित करते हुए कहीं। उन्होंने कहा कि निवेशक एमपी में नियम प्रक्रिया के जाल में न उलझें, इसलिए वे खुद भी हर सोमवार को निवेशकों से व्यक्तिगत मुलाकात करते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश में लॉजिस्टिक और गारमेंट सेक्टर में हब बनाने की दिशा में तेजी से काम हो रहा है। इंदौर और भोपाल में इसको लेकर काम हो रहा है। कभी डाकुओं की दहशत का पर्याय रहे चंबल के बीहड़ से होकर बनने वाले अटल एक्सप्रेस वे और नर्मदा एक्सप्रेस वे के दोनों ओर इंडस्ट्रियल टाउनशिप और इंडस्ट्रियल कॉरिडोर बनाने का काम किया जा रहा है। यहां आसान और सस्ती भूमि की उपलब्धता भी है। इसलिए यहां वे निवेशकों को आमंत्रित करते हैं।
सीएम चौहान ने इस दौरान कहा कि कोविड के दौर में 2019 के मुकाबले 2021में औद्योगिक इकाइयों में 49 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इंडस्ट्रीज को लैंड अलाटमेंट केमामले में 33 प्रतिशत, प्रस्तावित निवेश में 67 प्रतिशत और रोजगार में 39 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। ईज आफ डूइंग बिजनेस में सुधारों के चलते एमपी अतिरिक्त ऋण राशि का लाभ लेने वाले पांच राज्यों में शामिल है।
मुख्यमंत्री चौहान ने मंगलवार को नई शिक्षा नीति की टास्क फोर्स कमेटी की बैठक भी ली। इस बैठक में शिक्षा नीति में बदलाव के बाद अब तक इस दिशा में हुए काम की समीक्षा करने और इसमें बदलाव के लिए उठाए जाने वाले कदम पर चर्चा की गई। इस टास्क फोर्स कमेटी में शिक्षा जगत से जुड़े अफसर और अन्य पदाधिकारी भी मौजूद रहे। नई शिक्षा नीति को लेकर बनाई गई टास्क फोर्स में स्कूल शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार के अलावा प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा, आयुक्त लोक शिक्षण, आयुक्त राज्य शिक्षा केंद्र, सचिव माध्यमिक शिक्षा मंडल, संचालक राज्य ओपन बोर्ड, निदेशक महर्षि पतंजलि संस्कृत संस्थान शामिल हैं। इसके अलावा इस कमेटी में प्रदेश के अलग-अलग जिलों में पदस्थ शिक्षा विभाग के 19 से अधिक अफसरों को शासकीय प्रतिनिधि के रूप में शामिल किया गया है।
