हरिद्वार बाईपास रोड चौड़ीकरण दो हफ्ते से बंद, जगह-जगह हुआ अतिक्रमण
देहरादून
हरिद्वार बाईपास रोड का चौड़ीकरण करीब दो हफ्ते से बंद चल रहा है। सड़क पर अभी सिर्फ एक तरफ सब-ग्रेड (आधार) बनाने का काम हुआ है। लिहाजा, एक हिस्से पर काफी खाली जगह मिल जाने के चलते जगह-जगह अतिक्रमण ने पैर पसारने शुरू कर दिए हैं। कहीं सड़क पर टायर पंक्चर की दुकान चल रही है, तो कहीं वर्कशाप। इसके अलावा विभिन्न आटो शोरूम की पार्किंग भी सड़क पर ही की जाने लगी है। बाईपास रोड पर सब-ग्रेड का काम अक्टूबर माह की शुरुआत में ही पूरा कर दिया गया था। इसके बाद काम में निरंतर सुस्ती पसरती रही। बताया जा रहा है कि आगे का काम डिजाइन के आधार पर ही किया जाएगा। निर्माण कंपनी ने चौड़ीकरण के डिजाइन को थर्ड पार्टी जांच के लिए भेजा था और इसमें काफी समय लग गया। इसके चलते शुरुआती रफ्तार के बाद काम बंद करने की नौबत आ गई। हालांकि, राष्ट्रीय राजमार्ग खंड डोईवाला के अवर अभियंता नवीन शर्मा के मुताबिक निर्माण कंपनी राकेश कंस्ट्रक्शन का डिजाइन पास हो गया है और अंतिम स्वीकृति के लिए उसे खंड कार्यालय में जमा कराया जाना है। उम्मीद है कि दो-तीन दिन में काम शुरू कर दिया जाएगा। ठेकेदार को काम तेज गति से पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। दूसरी तरफ तकनीकी अड़चन के चलते बंद पड़े काम का लाभ अतिक्रमणकारी उठा रहे हैं। अभी बेशक अतिक्रमण अस्थायी है, मगर इनकी तरफ अनदेखी शहर की अन्य सड़कों की तरह भारी पड़ सकती है। फिलहाल इस तरफ न तो राष्ट्रीय राजमार्ग खंड के अधिकारी ध्यान दे रहे हैं, न ही पुलिस कुछ कर रही है।
सब-ग्रेड वाले हिस्से का वाहन नहीं कर पा रहे प्रयोग
बाईपास रोड के जिस भाग पर सब-ग्रेड बनाया गया है, उसका प्रयोग वाहन नहीं कर पा रहे। सब-ग्रेड की सतह जितनी प्राकृतिक ढंग से रूप लेगी, सड़क की मजबूती उतनी ही अधिक होगी। यदि वाहन इसका प्रयोग कर पाते तो यह काम अधिक तेजी से पूरा हो जाता। साथ ही मुख्य सड़क पर जाम की स्थिति के दौरान यह हिस्सा काफी राहत दे सकता है। वाहन इसका प्रयोग इसलिए नहीं कर पा रहे, क्योंकि मुख्य सड़क और सब-ग्रेड के भाग के बीच ऊंचाई सामान्य से अधिक है। लिहाजा, वाहनों के प्रयोग न करने के चलते भी यहां अतिक्रमण करना आसान हो गया है।
2012 से ठप पड़ी थी परियोजना
बाईपास रोड को चौड़ा करने का काम सितंबर 2012 में शुरू किया गया है। वर्ष 2014 तक काम पूरा करना था। तत्कालीन ठेकेदार अमृत डेवलपर्स की हीलाहवाली के चलते काम लटक गया था और फिर ठेकेदार से काम छीन लिया गया। तब तक महज 15 फीसद ही काम पूरा हो पाया था। वर्ष 2021 की शुरुआत में राजमार्ग खंड ने अवशेष कार्यों को पूरा करने के लिए नए सिरे से टेंडर आमंत्रित किए थे।
