ओमिक्रॉन के खौफ के बीच केंद्र ने राज्यों को दिए निर्देश- कोविड हॉटस्पॉट के 100% नमूनों को जांच के लिए भेजें
नई दिल्ली
कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन ने दुनियाभर में एक बार फिर से दहशत फैला दी है। यूं तो स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने कहा है कि देश में अभी तक इस वैरिएंट का एक भी मामला दर्ज नहीं हुआ है लेकिन डेल्टा वैरिएंट से मची तबाही के मद्देनजर केंद्र सरकार इस बार किसी तरह की ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है। आज से एयरपोर्ट पर जहां नई गाइडलाइंस लागू की जा रही हैं तो वहीं, केंद्र सरकार ने राज्यों को भी निर्देश दिए हैं कि वे कोविड हॉटस्पॉट के 100 फीसदी सैंपलों को जीनोम सिक्वेंसिंग के लिए भेजें ताकि ओमिक्रॉन वैरिएंट का तुरंत पता लगाया जा सके।
मंगलवार को केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय रिव्यू मीटिंग हुई। इस दौरान सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सलाह दी गई कि वे कोविड हॉटस्पॉट इलाकों के 100 फीसदी सैंपलों को जीनोम सिक्वेंसिंग के लिए मान्यता प्राप्त INSACOG लैब में भेजें। इससे पहले आरटी-पीसीआर टेस्ट में पॉजिटिव पाए गए सिर्फ पांच फीसदी नमूनों को ही जीनोम सिक्वेंसिंग के लिए भेजा जा रहा था।
केंद्र ने यह भी रेखांकित किया कि ऐसा नहीं है कि सार्स-सीओवी-2 का ओमिक्रॉन स्वरूप आरटी-पीसीआर और आरएटी जांच की पकड़ में नहीं आता। हॉटस्पॉट वह स्थान होता है जहां अधिक संख्या में कोविड-19 के मामले सामने आते हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने मंगलवार को संसद में कहा कि अभी तक देश में कोरोना वायरस के नये स्वरूप ओमिक्रॉन का कोई मामला सामने नहीं आया है और सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कदम उठा रही है कि यह देश में नहीं पहुंचे।
