नेचर ट्रेल और ट्रांजिट लाइन पर चलकर कलेक्ट हो रहा टाइगर काउंटिंग
भोपाल
राजधानी के आसपास के जंगलों में अल सुबह से ही नेचर ट्रेल और ट्रांजिट लाइन पर चल करबाघों के मूवमेंट का डेट कलेक्ट करने का काम चल रहा है। आज सुबह समरधा रेंज के जंगलों की16 बीटों में लगी टीमों ने बाघों के पगपार्क को चिन्हित करने का प्रयास किया। भोपाल वन मंडल के एसडीओ आरएस भदौरिया के अनुसार चार चरणों में बाघ गणना का काम जनवरी 2022 तक चलेगा। पहले चरण में होने वाली गणना में भोपाल शामिल है। मंडल की 45 बीट में सात दिनों तक बाघ सहित विभिन्न वन्य प्राणियों के डाटा एकत्रित किए जा रहे हैं।
राजधानी के आसपास के जंगलों बाघों की संख्या 18- 20 हो सकती है। यह अनुमान वन विभाग के अफसरों का है। इसका आधार बुधवार से शुरू हुई बाघ गणना में मिले प्रमाण हैं। अधिकारियों का कहना है कि पूर्व की तुलना में इस समय बाघ अधिक दिख भी रहे हैं। ये ट्रैप कैमरों के माध्यम से कैप्चर हुए हैं। बाघों की गणना के चलते जंगलों में गश्त और तेज हो गयी है और चरवाहों को भी जंगल जंगलों के भीतर न जाने को कहा गया है। बाघों की गिनती का नतीजा जनवरी में सामने आएगा। गणना के दौरान वनकर्मियों ने पैदल चलकर मौके पर मिले साक्ष्य मल, खरोंच के निशान, शिकार का अंश, पगमार्क आदि को एप के कॉलम में फीड किया।
बाघों की गणना के चलते शाकाहारी व मांसाहारी वन्यप्राणियों की गिनती करने के साथ बाघों की मौजूदगी का डाटा कलेक्शन इस बार पेपरलेस हाईटेक तकनीक से किया जा रहा है। भोपाल वनमंडल की समरधा रेंज में बाघ और बैरसिया रेंज में तेंदुए की उपस्थिति के साक्ष्य ज्यादा मिले हैं। रेंजर शिवपाल पिपरदे का कहना है कि पहले गणना का डाटा तय प्रोफार्मा में कागजों में भरकर भेजा जाता था लेकिन अब एम स्ट्राइप इकोलॉजिकल एप पर डाटा मौके पर ही भरा जा रहा है, जिसे डब्ल्यूआईआई को भेजा जाएगा। इससे गणना का काम तेजी से होगा।
