भारत में गर्भपात: कानून और अमल के बीच की खाई पाटने की कोशिश

दिल्ली

भारत ने जब पहली बार साल 1971 में गर्भपात कानून पारित किया, तो यह दुनिया के सबसे प्रगतिशील कानूनों में से एक था. पचास साल में एक संशोधन के बाद, देश अधिकार-आधारित गर्भपात देखभाल के लिए संघर्ष कर रहा है.शिल्पा (बदला हुआ नाम) को पता चला कि वह 21 साल की उम्र में गर्भवती थी. उसने कुछ ही समय पहले भारत की व्यावसायिक राजधानी मुंबई के एक कॉलेज में स्नातक पाठ्यक्रम में दाखिला लिया था. एक बड़े शहर में परेशान और अकेली, शिल्पा ने पास के एक अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञ से मिलने का समय लिया और एक ऑटो-रिक्शा से वहां चली गई. उसे बहादुरी के साथ जिस पहले सवाल का उत्तर देना था, वह था, "क्या आप विवाहित हैं?” भारत के कई हिस्सों में यह सवाल तब पूछा जाता है जब डॉक्टर यह जानना चाहता है कि क्या वह व्यक्ति सेक्स का अभ्यस्थ है. चूंकि यहां विवाह पूर्व सेक्स वर्जित है.

चिकित्सीय परामर्श लेते हुए गर्भावस्था के आठ महीने बाद, शिल्पा अपनी पहली नौकरी के लिए बंगलुरू चली गई. कुछ हफ्ते बाद, उसे अलग-अलग नंबरों से फोन आने लगा. कई पुरुषों ने उसे अलग-अलग समय पर फोन किया, दिन में भी और रात में भी. और उससे अजीबोगरीब सवाल पूछने लगे, जैसे ‘क्या तुमने अपने बच्चे को मार डाला?' ‘क्या आपका पति है?' ‘क्या आप अन्य पुरुषों के साथ सो रही हैं?' दरअसल, शिल्पा की कॉल डीटेल्स लीक हो गई थीं या तो पहले अस्पताल से या फिर स्त्री रोग विशेषज्ञ के क्लिनिक से. लेकिन इनमें से किसी ने भी इस वजह से हुए उनके उत्पीड़न की जिम्मेदारी नहीं ली. अंत में, उसने सभी अज्ञात कॉलर्स को ब्लॉक कर दिया और अपना फोन नंबर बदल दिया.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *