किसान फिर हाकिमों के द्वार, रबी की बुआई शुरू होते ही डीएपी गायब, मचा हाहाकार
पटना
रबी फसलों की बुआई शुरू हो गई है। किसान डीएपी खाद (डाई अमोनिया फास्फेट) के लिए भटक रहे हैं। ज्यादा दाम देने के बाद भी डीएपी नहीं मिल पा रही है। यह हाल तब है जब डीएपी की सबसे अधिक जरूरत है। लिहाजा किसान परेशान हैं और एक बार फिर हाकिमों से गुहार लगा रहे हैं।
ऐसे में किसान डीएपी के लिए मारामारी कर रहे हैं। दरअसल, अंतरराष्ट्रीय बाजार में फास्फोरिक एसिड महंगा होने के बाद कंपनियों ने डीएपी मंगाना बंद कर दिया है। इसलिए यह किल्लत पैदा हुई है। भारत में ज्यादा डीएपी खाद आयात की जाती है। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार मिट्टी में जड़ और पौधे के डंठल (तना) के विकास के लिए फॉस्फेट और पोटाशयुक्त खाद की जरूरत होती है। इसलिए बुआई के समय ही डीएपी देना फायदेमंद है।
लखीसराय के किसान परमानंद सिंह बताते हैं कि 10 एकड़ में दलहनी फसलों की खेती करते हैं। पहले खेत से पानी नहीं निकल रहा था, अब पानी निकल गया है और खेत की तैयारी कर रहे हैं तो डीएपी खाद नहीं मिल रही है। वे लखीसराय से लेकर पटना के बाजार में खाद के लिए दौड़ लगा चुके है लेकिन खाद कहीं भी नहीं मिल रही है। मोकामा के किसान अवनिश कुमार 5 एकड़ में मसूर की खेती करते हैं। उन्हें डीएपी कहीं भी नहीं मिल रही है। हर जिले में डीएपी खाद के लिए हाहाकार मचा है। किसान प्रखंड और किसान भवन के सामने हर दिन हंगामा कर रहे हैं।
