जाने क्या कहा डॉक्टर ने दिल्ली के भयानक पोलुशन पे

 पिछले 15 दिनों में दिल्ली-एनसीआर का प्रदूषण अपने खतरनाक स्तर पर पहुंच चुका है. वायु प्रदूषण का सेहत पर सबसे ज्यादा असर पड़ता है. ऐसा हवा में मौजूद छोटे-छोटे कणों, PM10, PM2.5 और सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड, ओजोन और कई अन्य गैसों के कारण होता है. PM2.5 बहुत ही बारीक कण होते हैं जिनका व्यास 2.5 माइक्रोमीटर या उससे छोटा होता है. ये सांस के जरिए हमारे शरीर में आसानी से प्रवेश कर जाते हैं और इनकी वजह से हर तरफ धुंधला दिखाई देता है. गाड़ियों से निकलने वाले धुएं, निर्माण कार्य, पराली जलाने और बिजली संयंत्रों के कारण वायु में ये प्रदूषण तेजी से फैला है. दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल के सीनियर कंसल्टेंट रेस्पिरेटरी मेडिसिन एंड क्रिटिकल केयर डॉक्टर राजेश चावला ने इस प्रदूषण के शरीर पर होने वाले नुकसान और बचाव के बारे में विस्तार से बताया है.

प्रदूषण का श्वसन तंत्र पर असर

डॉक्टर के अनुसार, इस प्रदूषण में सांस लेने पर ये सभी हानिकारक कण और गैस श्वास नलिकाओं के माध्यम से फेफड़ों में गहराई तक पहुंच जाते हैं. ये सूजन बढ़ाते हैं और खून में प्रवेश कर सकते हैं. डॉक्टर चावला का कहना है कि, 'जब आप PM2.5 के संपर्क में आते हैं तो आपको आंखों, गले और नाक में जलन महसूस होती है जिसकी वजह से आंखों में पानी आना, गले में खराश, छींक और नाक बहने लगती है.'

खतरनाक है PM2.5

2015 में की गई चीन की एक स्टडी के मुताबिक, PM2.5 सांद्रता में प्रत्येक 10 माइक्रोग्राम की वृद्धि मरीजों की मौत से जुड़ी होती है. PM2.5 कार्बनिक घटकों और भारी धातुओं से बना है. इसके संपर्क में आने से श्वसन तंत्र में ऑक्सीडेटिव तनाव और श्वसन प्रतिक्रिया होती है. इंफ्लेमेशन (सूजन) सांस की बीमारियों का मुख्य कारण है. डॉक्टर चावला का कहना है कि PM2.5 के संपर्क में आने से क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव लंग डिजीज का खतरा और पल्मोनरी इंफेक्शन के मामले बढ़ जाते हैं. ये भी देखा गया है कि इसके संपर्क में आने से अस्थमा के मरीजों पर अस्थमा के अटैक ज्यादा और तेजी से आते हैं.

PM2.5 न केवल फेफड़ों के कैंसर की संभावना बढ़ाता है बल्कि फेफड़ों के कैंसर से होने वाली मौतों की संख्या भी बढ़ा देता है. लंबे समय तक इसके संपर्क में रहने का असर हृदय प्रणाली और वाहिकाओं पर भी पड़ता है. यह धमनियों को सख्त कर देता है जिससे दिल की बीमारियां और मौतें बढ़ जाती हैं. ये लीवर और इंसुलिन उत्पादन पर भी बुरा असर डालता है.

एक्सपोजर से कैसे बचें

डॉक्टर का कहना है कि बाहर के प्रदूषण से बचने के लिए कुछ खासों बातों का ध्यान रखना जरूरी है जैसे कि अपना स्थानीय AQI अपडेट चेक करते रहें. अगर वातावरण में AQI इंडेक्स अधिक है तो घर से बाहर न जाएं. प्रदूषण का स्तर अधिक होने पर अपने घर की खिड़कियां और दरवाजे बंद रखें. अगर आपको बाहर जाना है तो कम से कम 3 लेयर वाला सर्जिकल या N95 मास्क पहनें. इस समय बच्चों को घर से बाहर न ले जाएं. AQI इंडेक्स खतरनाक स्तर पर होने पर स्कूल बंद कर देना चाहिए. अगर आप कार से कहीं बाहर जा रहे हैं तो खिड़की के शीशे बंद रखें. स्मोकिंग और धुएं से बचें, खूब सारा पानी पिएं, सब्जियों और फलों का अच्छी मात्रा में सेवन करें. अगर आप सांस के मरीज हैं, तो आपको अपनी दवाओं को लेकर डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए. घर में एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें, खासकर अगर सांस की बीमारियों से पीड़ित मरीज हैं तो ये जरूरी है.

सरकार को क्या करना चाहिए

डॉक्टर चावला ने प्रदूषण से बचने के लिए सरकार को भी कुछ सलाह दी हैं. जैसे कि सरकार को साल भर के हिसाब से कोई लंबा प्लान बनाना चाहिए. केंद्र और राज्यों को वायु प्रदूषण को बढ़ने से रोकने के लिए सख्त कानून बनाने के लिए मिलकर काम करने की जरूरत है. AQI का स्तर अधिक होने पर स्कूलों को बंद कर देना चाहिए. प्रदूषण के बारे में शिक्षा और जागरुकता बढ़ाने पर काम करना चाहिए. पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम को मजबूत करना चाहिए. पराली जलाने के वैकल्पिक तरीकों को अपनाने में किसानों की मदद करनी चाहिए. वायु प्रदूषण पर काम कर रहे एनजीओ को और प्रोत्साहित करना चाहिए.

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