भाजपा ने बनाई पंजाब में सिखों के बीच पैठ बनाने की रणनीति

चंडीगढ़
पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। लगभग सभी पार्टियां इसकी तैयारी में जुट गई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) भी अपने जनाधार को बढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है। भगवा पार्टी को उम्मीद है कि करतारपुर कॉरिडोर के रास्ते पंजाब में उसकी एंट्री हो सकती है। आज ही केन्द्र सरकार ने कोविड महामारी के संक्रमण में कमी को देखते हुए गुरुनानक देव जी के 552 वें प्रकाश उत्सव के पहले पाकस्तिान स्थित गुरुद्वारा करतारपुर साहिब जाने के लिए बनाये गये गलियारे को कल यानी बुधवार से खोलने का निर्णय लिया है।  आपको बता दें कि हाल ही में पंजाब बीजेपी के कुछ नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी। इस दौरान उन्होंने करतारपुर कॉरिडोर खोलने की अपील की थी। इस प्रतिनिधिमंडल में पंजाब भाजपा प्रभारी दुष्यंत कुमार गौतम, प्रदेश अध्यक्ष अश्विनी कुमार शर्मा, राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ, राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य हरजीत सिंह ग्रेवाल सहित अन्य नेता शामिल थे। भगवा डेलिगेशन की इस मुलाकात के बाद ही इसे खोलने का फैसला हुआ है।

अकाली अब तक सिखों पर दावा करती और भाजपा हिंदुओं पर
भाजपा पहली बार शिरोमणि अकाली दल के बिना पंजाब की सियासी लड़ाई में उतरने जा रही है। दोनों ने मिलकर 1997 से लेकर 2017 तक पंजाब में हुए पांच विधानसभा चुनावों में से तीन में जीत हासिल की थी। जब दोनों दल साथ मिलकर पंजाब में चनाव लड़ते थे तो अकाली का सिखों पर दावा हुआ करता था। वहीं, बीजेपी हिंदू मतदाताओं के बल पर अकाली से सीट शेयरिंग करती आ रही थी।

सिखों में पैठ बनाने की कोशिश कर रही भाजपा
2022 में होने वाले विधानसभा चुनावों में बदली हुई परिस्थिति है। बीजेपी अब धीरे-धीरे सिखों को रिझाने की कोशिश कर रही है। करतारपुर कॉरिडोर को प्रकाश पर्व से पहले खोलने का फैसला बीजेपी की उन्हीं कोशिशों का हिस्सा है। 2011 में हुई जनगणना के मुताबिक, पंजाब में करीब 58 प्रतिश आबादी सिखों की है। इसके अलावा 38 प्रतिशत के करीब हिंदू और 2 प्रतिशत मुस्लिम हैं। 

मोदी राज में ही हुआ है करतारपुर कॉरिडोर का उद्धाटन
इस कॉरिडोर का उद्घाटन 9 नवंबर, 2019 को किया गया था। अगस्त के महीने में पाकिस्तान ने भारत समेत 11 देशों की यहां यात्रा पर प्रतिबंध लगाया था। डेल्टा वैरिएंट के प्रकोप की वजह से पाकिस्तान ने 22 मई से लेकर 12 अगस्त तक भारत को 'सी' कैटेगरी में डाल दिया था। 16 मार्च, 2020 को भारत और पाकिस्तान ने कोविड-19 को देखते हुए अस्थाई तौर पर करतारपुर साहिब की यात्रा पर प्रतिबंध लगाया था।

सिख समुदाय के लिए क्यों खास है करतारपुर गुरुद्वारा?
पाकिस्तान स्थित गुरुद्वारा श्री करतारपुर साहिब सिखों के लिए सबसे पवित्र स्थान है। यह भारतीय सीमा से 4 किलोमीटर की दूरी पर है। सिखों के गुरु नानक जी ने करतारपुर को बसाया था और यहीं उन्होंने अंतिम सांस ली थी। करतारपुर साहिब, पाकिस्‍तान के नारोवाल जिले में है जो पंजाब मे आता है। कहा जाता है कि गुरुनानक देव ने यहां अपने जीवन के 17 साल बिताए थे। करतारपुर गुरुद्वारा साहिब का निर्माण 1,35,600 रुपए की लागत में किया गया था। यह राशि पटियाला के महाराजा सरदार भूपिंदर सिंह ने दी थी। 1995 में पाकिस्तान सरकार ने इसकी मरम्मत कराई थी और 2004 में इसे पूरी तरह से संवारा गया। कहा जाता है कि यहीं से सबसे पहले लंगर की शुरुआत हुई थी।
 

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