हाई हील से सेहत का कचूमर
कॉरपोरेट दुनिया हो या स्कूल कॉलेज की, पार्टी या फिर रैंप पर चलने की बात हो, पहनावे में हाई हील के जूते या सैंडल पहनना आम बात है। इन्हें पहन कर लगता है कि उनका आत्मविश्वास बढ़ गया है। चाल तो बदलेगी ही, लेकिन उन्हें पहन कर लटक-मटक के साथ चलने के लिए उन्हें क्या-क्या दांव पर लगाना पड़ता है, इसका अंदाजा पहले नहीं हो पाता। बाद में जब पैरों से लेकर रीढ़ की हड्डी तक में दर्द की शिकायत होने लगती है तो पता चलता है कि यह फैशन बड़ा ही दुखदायी है। चाल व शरीर का संतुलन बिगड़ जाता है।
आजकल की किशोरियों में यह खतरा अधिक माना जाता है क्योंकि वे छोटी आयु से ही ऊंची एड़ी के जूते पहनने लगती हैं। बड़े होने पर उन्हें कूल्हों का दर्द से लेकर कमर दर्द का जोखिम अधिक रहता है क्योंकि किशोरावास्था में उनकी मेरुदंड पर अधिक प्रभाव पड़ता है।
इससे मोच की समस्या आम तौर पर हो जाती है क्योंकि एड़ी उठा कर चलना कोई आसान काम नहीं है। परिणामस्वरूप स्प्रेन ऑफ द फुट यानी पैर में मोच। यह एक आम समस्या है जो अक्सर हाई हील के कारण ही होती है। यह समस्या 20 से लेकर 35 वर्ष तक की युवतियों को ज्यादा होती है क्योंकि आजकल ज्यादातर युवतियां फैशन परस्त हैं और अपने आप को मॉडर्न दिखाने के लिए हाई हील पहनना उनका शौक बनता जा रहा है।
शुरुआत में तो इसका प्रभाव सिर्फ पैरों में सूजन के रूप में देखने को ही मिलता है, लेकिन साल दो साल बाद लगातार हील पहनने की वजह से पांव में लगातार दर्द, नसों में खिंचाव, पीठ दर्द और घुटनों में दर्द के रूप में दिक्कतें सामने आती हैं। शुरुआत में बार-बार पांव में मोच आती है और गंभीर रूप से दर्द होता रहता है। इलाज के रूप में जो भी पहनते हैं, उसमें मैट्रोसॉल बार लगानी पड़ती है।
कदम-कदम पर परेशानी
हाल के अनुसंधान से पता चलता है कि लंबे समय तक 'किलर हील्सÓ पहनने वाली एक-तिहाई महिलाओं की पैरों की अंगुलियों के फूलने (हैमरटोज) से लेकर टांग की नसों में गोखरू (बनियोन) जैसी दर्दनाक स्थायी बीमारियां होने लगती हैं। ऊंची एड़ी के जूतों से पूरे पैर में परेशानी शुरू हो जाती है। जब पैर का बड़ा अंगूठा ठीक से घूम नहीं सकता तो उसकी भरपाई करने के लिए घुटने को घुमाना पड़ता है। परिणामस्वरूप घुटने पर दबाव आने से स्थाई नुकसान हो सकता है। कुछ महिलाएं इस परेशानी से बचने के लिए अपनी चाल को बदल लेती हैं, लेकिन इससे कमर के निचले हिस्से में दर्द होने लगता है।
पांव की शेप का सत्यानाश
हील किसी भी रूप में पहनी जाए तो वह पैर के अगले हिस्से को चौड़ा कर देती है। हाई हील पहनना किसी भी स्त्री के लिए कितना खतरनाक हो सकता है, यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि वो कितना चलती है और कितने समय तक खड़ी रहती है।
अस्पताल ले जाती हैं हाई हील
हाई हील पहनने की वजह से पैरों में सूजन भी रहने लगती है और सबसे ज्यादा असर तो रीढ़ की हड्डी पर पड़ता है। हील पहनने से उस पर प्रेशर पड़ता है जिस कारण हड्डी के एक हिस्से में लगातार दर्द रहने लगता है। एक सर्वे के अनुसार देश की बीस लाख औरतें किसी न किसी रूप में हाई हील के कारण दुर्घटनावश अस्पताल पहुंचती हैं। चिकित्सकों के मुताबिक लंबे समय तक ऊंची एड़ी के जूते या सैंडिल पहनना खतरे से खाली नहीं है। लंबे समय तक ऊंची एड़ी के जूते पहनने से होने वाले नुकसान को लेकर विशेषज्ञों की चिंता बढ़ रही है।
दिक्कत है, दर्द है, मगर फैशन है
दस में से एक महिला सप्ताह में कम-से-कम तीन दिन ऊंची एड़ी के जूते पहनती हैं और हाल के सर्वे से पता चला है कि उनमें से एक-तिहाई महिलाएं ऊंची एड़ी के जूतों की वजह से गिर जाती हैं। ऊंची एड़ी के जूते पहनने से आपकी एड़ी ऊंची हो जाती है और ऐसे जूते पहनते ही आपके शरीर का झुकाव आगे की ओर हो जाता है।
कौन करेगा पैरोकारी
ऊंची एड़ी के जूतों की पैरवी में कुछ नहीं कहा जा सकता। औसत महिलाएं ऊंची एड़ी के जूते नहीं पहनतीं, यह उनके लिए बेशक अच्छी बात है। जब आपकी कमर का निचला हिस्सा आगे की ओर झुकता है तो इसका संतुलन बनाए रखने के लिए आपको मेरुदंड की स्थिति में बदलाव करना पड़ता है। इससे पीठ की नसों पर दबाव पड़ता है और इसकी वजह से स्थिति और बदतर हो जाती है। इसकी वजह से साइटिका नामक बीमारी हो सकती है जिसमें नसें खिंच जाती हैं और पैर के नीचे की ओर दर्द रहता है और वह सुन्न हो जाता है।
कभी-कभी पहनें हील
जो महिलाएं अधिकतर ऊंची एड़ी के जूते पहनती हैं, उन्हें नस खिंचने की बीमारी हो जाती है क्योंकि जैसे ही एड़ी ऊपर की ओर उठती है, वैसे ही नस खिंचने लगती है। इसे पुन: खींचकर फैलाना बहुत पीड़ाजनक हो सकता है। तीन या अधिक महिलाओं का एचिली टेंडन खिंच सकता है। यह स्थिति तब की है जब वे प्रतिदिन ऊंची एड़ी नहीं पहनतीं या सप्ताह में एक या दो बार पहनती हैं। कई महिलाओं को हैमरटोज भी हो जाता है क्योंकि टाइट फिटिंग वाले जूते पैर की अंगुलियों को मोड़ देते हैं, अंदर की मांसपेशियां छोटी होने से अंगुलियां हमेशा के लिए मुड़ जाती हैं। अन्य आम शिकायतों में गोखरू, गलत फिटिंग वाले जूतों से अंगूठे के नीचे की हड्डी का बढऩा, तथाकथित पम्प-बम्प शामिल है जिसमें बम्प स्टाइल के जूतों के फीतों तथा कठोर बैक से एड़ी की हड्डी बढ़ती है।
समस्या होने पर क्या करें
हाई हील के बजाए फुटवियर के रूप में प्लेन चप्पल पहनें, जिसमें एक समान बोझ पैर पर पड़े।
अगर दर्द बढऩे लगे तो डॉक्टर की सलाह लें।
पैरों, घुटनों, रीढ़ की हड्डी में दर्द होने पर सिकाई करें। चाहें तो गर्म पानी में नमक डालकर सेंक सकते हैं।
डॉक्टर का सलाह से एक्सरसाइज भी की जा सकती है।
ज्यादा दर्द रहने पर सलाह से ही दर्द निवारक दवाएं लें।
ऊंची एड़ी के जूतों से होने वाले जोखिम को कम करने के लिए थोड़ी-सी मोटी एड़ी वाले जूते पहनें क्योंकि इससे भार अधिक समानता से फैलेगा। अंदर नरम इंसोल्स पहनने से घुटनों पर पडऩे वाले प्रभाव में कमी आती है। ध्यान रखें आपके जूते की फिटिंग सही हो ताकि वह आगे की ओर न फिसलें। ऐसा होने से उंगलियों पर अधिक दबाव पड़ता है।
नियमित रूप से ऊंची एड़ी के जूते पहनना स्वास्थ्य की दृष्टि से अच्छा नहीं होता। औपचारिक अवसरों पर थोड़ी देर के लिए उनका उपयोग करना ठीक हो सकता है। यदि आप कुछ घंटे के लिए ऊंची एड़ी के जूते पहनें तो कोई नुकसान नहीं होगा।
