सरकारी प्रतिभूतियों में समझदारी से करें निवेश, इन बातों का रखें ध्यान

नई दिल्ली
निवेश सलाहकार संदीप जैन का कहना है कि रिजर्व बैंक ने कोरोनाकाल में नीतिगत ब्याज दरें (रेपो रेट) 2.5 फीसदी घटा दी हैं। इससे एफडी, पीपीएफ, एनएससी सहित सभी लघु बचत योजनाओं पर ब्याज दरों में गिरावट आई है।

अब खुदरा निवेशक गिल्ट खातों के जरिये सीधे प्रतिभूतियों में पैसे लगा सकेंगे, जिससे टीयर-2 और टीयर-3 शहरों के छोटे निवेशकों के साथ सेवानिवृत्त और वरिष्ठ नागरिकों का रुझान भी इसमें बढ़ेगा। प्रतिभूतियों की ओर ऐसे निवेशक भी आकर्षित होंगे, जो अभी तक सिर्फ एफडी और एलआईसी जैसे निश्चित रिटर्न वाले विकल्पों में ही पैसे लगाते थे। प्रतिभूतियों पर ब्याज उनके जारी होने के समय ही निश्चित कर दिया जाता है, जिससे इन पर बाजार के उतार-चढ़ाव का असर नहीं पड़ता।

कोरोना का खतरा कम होने के साथ रिजर्व बैंक फिर रेपो रेट बढ़ाने पर विचार कर सकता है। एक साल में प्रतिभूतियों पर एफडी के मुकाबले काफी ज्यादा (7.17 फीसदी तक) रिटर्न मिला है। लेकिन ब्याज में इजाफा होने के बाद रिटर्न पर सीधा असर दिखेगा। आरबीआई दरें बढ़ाता है तो अभी प्रतिभूतियां खरीदने वाले निवेशकों को कम ब्याज की पेशकश होगी, जबकि बाद में इसकी ब्याज दरें भी बढ़ सकती हैं। लिहाजा ऐसे निवेशकों को ज्यादा मुनाफे पर प्रतिभूति बेचना मुश्किल होगा।

प्रतिभूतियों के मूल्य और प्रतिफल में उल्टा संबंध होता है। इसका मतलब है कि जब ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो इसकी मांग घटने लगती है और इस पर नए निवेशक को ज्यादा रिटर्न मिलता है। वहीं, पहले खरीदी प्रतिभूतियों के निवेशकों को नुकसान उठाना पड़ता है। उदाहरण के लिए, कोई निवेशक 7 फीसदी ब्याज दर वाली प्रतिभूतियां खरीदता है और ब्याज बढ़ने पर कुछ साल बाद उस पर 7.5 फीसदी या 8 फीसदी का ब्याज पेश किया जाता है, तो नए निवेशक ज्यादा ब्याज वाली प्रतिभूतियों में ही पैसे लगाना पसंद करेंगे। ऐसे में मौजूदा निवेशकों को अपनी प्रतिभूतियां बेचना मुश्किल हो जाएगा। अगर ब्याज दरें घटती हैं, तो आपकी प्रतिभूतियों की मांग बढ़ जाएगी और आप ज्यादा मुनाफा कमा सकेंगे।

रकम लगाने से पहले ये जानकारी जरूरी

  • प्रतिभूतियों में 10 साल जैसी लंबी अवधि के लिए पैसे लगाने पर ब्याज का जोखिम कम हो जाता है।
  • पूरी तरह सुरक्षित विकल्प तलाशने वालों के लिए प्रतिभूतियां बेहतर मौका साबित हो सकती हैं।
  • हर प्रतिभूति की परिपक्वता अवधि अलग-अलग होती है और उसी हिसाब से ब्याज दरें तय की जाती हैं।
  • निवेशक को ब्याज दरों पर निगाह रखनी होगी और योजना में एंट्री व एग्जिट का सही अनुमान लगाना होगा।

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