ईलॉन मस्क का इतना महंगा इंटरनेट गांवों में कौन लेगा!

दिल्ली
भारत के ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट पहुंचाने की ईलॉन मस्क की कोशिश कितनी कामयाब हो पाएगी, इस पर संदेह है. वजह है इसकी भारी-भरकम कीमत. इतनी महंगी सेवा क्या गांवों में चल पाएगी!देश के दुर्गम इलाकों तक इंटरनेट की सुविधा मुहैया कराने के सरकार के तमाम दावों के बावजूद इंटरनेट कनेक्टिविटी के मामले में देश के ग्रामीण इलाके शहरी इलाकों के मुकाबले काफी पिछड़े हैं. अब ईलॉन मस्क की रॉकेट कंपनी स्पेसएक्स के सैटेलाइट इंटरनेट डिवीजन स्टारलिंक की ताजा पहल और भारत सरकार की ओर से बीते महीने इंडियन स्पेस एसोसिएशन (आईएसपीए) की शुरुआत ने तस्वीर बेहतर होने की उम्मीद तो जगाई है. समस्या यह है कि इन दोनों प्रस्तावों का हकीकत में बदलना अब भी दूर की कौड़ी लगती है. इंटरनेट ऐंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया के मुताबिक वर्ष 2020 में भारत में 62.2 करोड़ से अधिक इंटरनेट उपभोक्ता थे. यह आंकड़ा 2025 तक बढ़ कर 90 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है. ईलॉन मस्क की निगाहें इसी बाजार पर हैं. शहरी और ग्रामीण इलाकों में खाई इंटरनेट की पहुंच के मामले में शहरी और ग्रामीण इलाकों में खाई साफ नजर आती है. देश की शहरी आबादी के 67 फीसद हिस्से तक इंटरनेट की पहुंच है जबकि ग्रामीण भारत में यह आंकड़ा महज 31 फीसद है. इसके पीछे इंटरनेट का सुलभ नहीं होना और आम लोगों के सामर्थ्य से दूर होना भी प्रमुख वजह है.
 

रिलायंस जियो ने शहरी इलाकों में भले इंटरनेट क्रांति पैदा कर दी हो, ग्रामीण इलाकों में इसकी पहुंच तो कम है ही, कीमत भी आम लोगों की जेब पर भारी है. नेशनल सैंपल सर्वे की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, देश में महज 4.4 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों के पास ही कंप्यूटर उपलब्ध है. शहरी क्षेत्र में यह आंकड़ा बढ़कर 14.9 प्रतिशत तक पहुंच जाता है. ग्रामीण क्षेत्रों के 14.9 प्रतिशत परिवारों को ही इंटरनेट की सुविधा मिल पाती है लेकिन शहरी इलाकों में यह संख्या 42 फीसदी यानी करीब तीन गुनी ज्यादा है. एक और उदाहरण से शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों की खाई और साफ हो जाती है. शहरी इलाकों में जहां प्रति सौ व्यक्ति पर 104 इंटरनेट कनेक्शन हैं वहीं ग्रामीण इलाको में यह आंकड़ा महज 27 ही है. शहरी इलाकों में कई मोबाइल फोनों में दो-दो सिम कार्ड होने की वजह से आंकड़ा बढ़ जाता है. सैटेलाइट इंटरनेट की तैयारी देश के ग्रामीण इलाकों में इस खाई को पाटने के लिए ही अब सैटेलाइट इंटरनेट मुहैया कराने की पहल हो रही है. हालांकि ऑप्टिकल फाइबर केबल के मुकाबले इसकी स्पीड कम होगी.

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