नॉन क्लासिकल सिंगिग लीजेंड स्वर्गीय किशोर कुमार हैं मेरे आदर्श- गायक मोहित चौहान
भोपाल
मिंटो हॉल में आयोजित एक्सपर्ट शॉट् 2.0 वर्कशॉप में प्रसिद्ध बॉलीवुड प्लेबैक सिंगर मोहित चौहान ने शहर के युवाओं और म्यूजिक लवर्स से इंटरेक्शन किया और उन्हें गायकी के गुर सिखाए। इस अवसर पर प्रमुख सचिव संस्कृति एवं पर्यटन शिव शेखर शुक्ला भी प्रमुख रूप से उपस्थित हुए। अपने जीवन के अनुभव को साझा करते हुए मोहित चौहान ने कहा ने बताया कि दिल्ली में रहने के दौरान उन्हें बहुत सारी सुविधाओं का अभाव था लेकिन उन्होंने इसे कभी अपना स्ट्रगल पीरियड नहीं माना बल्कि इसे जीवन का एक हिस्सा समझा।
कंफर्ट जोन से बाहर निकल कर गाया साड्डा हक़..
मोहित चौहान ने कहा आपकी जो अपने स्ट्रेंथ हैं उसे प्लेबैक सिंगिंग में उपयोग करना चाहिए। संगीतकार ए आर रहमान साहब ने रॉकस्टार फिल्म के फेमस सॉन्ग साड्डा हक गाने के पहले मुझे बताया कि यह हाई एनर्जी सॉन्ग है। मुझे इसे गाने में थोड़ी परेशानी हो रही थी। मैंने जब उनसे बात की तो उन्होंने मुझे कहा कि तुम अपने कंफर्ट जोन से बाहर निकलो और इसे गाओ क्योंकि तुम में वह काबिलियत है और तुम कर पाओगे। हुआ भी यही मैंने अपने पंचायत मैंने अपना कंफर्ट जोन छोड़ा और गाने को पूरा किया।
नॉन क्लासिकल सिंगिग के लीजेंड किशोर कुमार मेरे आदर्श
मोहित चौहान ने एक यूथ सिंगर दुष्यंत के प्रश्न का उत्तर देते हुए बताया कि नॉन क्लासिकल सिंगिग का सबसे बेहतरीन और सटीक उदाहरण लीजेंड स्वर्गीय किशोर कुमार हैं, जो कि मेरे आदर्श है। जिन युवाओं को क्लासिकल सिंगिग का शौक है उन्हें क्लासिकल सिंगिंग सीखनी चाहिए। यह भी संगीत की आवश्यक विधा है। इससे सुरों का सही ज्ञान होने के साथ ही सुर पक्के होते है। क्लासिकल सिंगिग के लिए सबसे जरूरी गले को रवां करना होता है। जहां तक नॉन क्लासिकल प्लेंवैक सिंगिग की बात है, उसके लिए दिल में सिंगिंग और बेसिक म्यूजिक का ज्ञान और एक्सप्रेशन का होना बहुत जरूरी है। मोहित ने बताया कि कॉलेज के दिनों में सिंगिग के साथ वे थियेटर में भी रोल प्ले करते थे। थियेटर में एक्सप्रेशन का बड़ा रोल होता है, जिसका फायदा उन्हें अब सिंगिग में भी मिलता है। मोहित चौहान ने कहा की आपकी जो अपनी स्ट्रेंथ है उसको प्लेवैक सिंगिग में उपयोग करना चाहिए।
प्रदेश के कलाकारों के शिक्षण और प्रशिक्षण के लिए नई पहल प्रारंभ की है
प्रमुख सचिव संस्कृति एवं पर्यटन शिव शेखर शुक्ला ने कहा कि फिल्म इंडस्ट्री ने प्रदेश के नैसर्गिक सौंदर्य, लोगों की आत्मीयता और वर्क कल्चर को सराहा है। पिछले वर्षों में मध्यप्रदेश में 70 से अधिक फ़िल्म प्रोजेक्ट संपन्न हुए हैं। यह फिल्म प्रोजेक्ट और वेब सीरीज निर्माण युवाओं की उन्नति का माध्यम बने, यह सोचकर पर्यटन विभाग ने प्रदेश के कलाकारों के शिक्षण और प्रशिक्षण के लिए नई पहल प्रारंभ की है। शुक्ला ने कहा कि अनेक प्रतिष्ठित निर्देशक एवं फिल्म निर्माताओं ने मध्यप्रदेश में फिल्म निर्माण का सिलसिला शुरू किया जिसने फिल्म इंडस्ट्री के सभी बड़े फिल्मेकर का ध्यान मध्यप्रदेश की ओर खींचा है। अब मध्यप्रदेश फिल्म मेकिंग का सबसे फेवरेट डेस्टिनेशन बन गया है। यह कार्यशाला न सिर्फ प्रदेश के युवाओं के लिए लाभदायक होगी बल्कि फिल्म इंडस्ट्री को स्थानीय स्तर पर ही कुशल कलाकार उपलब्ध हो सकेंगे।
