योगी सरकार ने बंद किए सेवा मंडल से भर्ती के सभी रास्ते, IBPS को दिया जिम्मा

 लखनऊ 
उत्तर प्रदेश में सहकारी बैंकों और सहकारिता विभाग की अन्य संस्थाओं से भर्तियों में होने वाले घोटालों पर रोक के लिए एक साल पूर्व जारी आदेश से छेड़छाड़ करने की कोशिशें पूरी तरह नाकाम हो गई हैं। संबंधित खबर आपके अपने अखबार ‘‘हिन्दुस्तान’’ में प्रकाशित होने के दो दिन के अंदर ही सहकारिता विभाग के बैंकों के साथ ही सभी संस्थाओं में कार्मिकों की भर्ती बैकिंग वैयक्तिक चयन संस्थान (आईबीपीएस) से कराने का आदेश जारी किया गया है।

दरअसल वर्ष 2012 से 2017 के बीच सेवा मंडल के माध्यम से सहकारिता विभाग की संस्थाओं में हुई सभी भर्तियों में घोटाले की सूचनाएं मिलने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर एक साल पूर्व तत्कालीन अपर मुख्य सचिव सहकारिता एमवीएस रामीरेड्डी ने भर्ती प्रक्रिया से सेवामंडल को बाहर कर दिया था। उस समय यह आदेश जारी किया गया था कि सहकारी बैंकों में कार्मिकों की भर्ती आईबीपीएस से तथा अन्य संस्थाओं में कार्मिकों की भर्ती टाटा कंसल्टेंसी से कराया जाएगा। बीते जुलाई में सहकारिता विभाग ने सहकारी बैंकों में भर्ती आईबीपीएस से कराने का नया शासनादेश जारी किया। इसमें सहकारिता की अन्य संस्थाओं में भर्ती किस माध्यम से होगी, इसका जिक्र नहीं किया गया था। जिसके बाद से यह चर्चा आम हो गई थी कि सहकारिता की भर्तियों में फिर से सेवा मंडल को लाने की साजिशें की जा रही हैं।
 
‘हिन्दुस्तान’ में यह खबर बीते 10 अक्तूबर को ‘‘सहकारिता में भर्ती का काम सेवा मंडल को देने की तैयारी’’ शीर्षक से प्रकाशित की गई थी। इस खबर के प्रकाशित होने के दो दिन बाद 12 अक्तूबर संयुक्त सचिव उ.प्र. शासन डा. दीपक कोहली ने सहकारिता की बैंकिंग संस्थाओं से इतर शीर्ष सहकारी संस्थाओं में भी कार्मिकों की भर्ती आईबीपीएस से ही कराने के लिए आयुक्त एवं निबंधक सहकारिता को पत्र लिखा। जिसमें लिखा है कि आईबीपीएस से अन्य संस्थाओं में भर्ती कराने में कोई विधिक अड़चन नहीं है। इसके लिए अधिसूचना का प्रारूप हिन्दी व अंग्रेजी में शासन को तत्काल उपलब्ध कराने को कहा है, ताकि अगली कार्यवाही की जा सके।

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