बीजेपी सत्ता में वापसी के लिए चेहरों के जरिए साधेगी जातियों को
लखनऊ
सूबे की सत्ता में वापसी के लिए भारतीय जनता पार्टी ने अब जातीय क्षत्रपों को साधने का फैसला किया है। इसे अमजीलामा पहनाने को पूरी कवायद भी कर ली है। भाजपा 17 अक्तूबर से प्रदेश में पिछड़ी, अति पिछड़ी और दलित जातियों के अलग-अलग सम्मेलन करने जा रही है। इनमें अपनी जातियों में प्रभाव रखने वाले चेहरों पर फोकस किया जा रहा है।
वर्ष 2017 के रण में अगड़ों के साथ-साथ पिछड़ों ने भाजपा की नैया पार लगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। भाजपा अब फिर इन्हीं पिछड़ों और अति पिछड़ों को साधने में जुटी है। जातीय सम्मेलनों को कराने का जिम्मा ओबीसी मोर्चा को सौंपा गया है। पार्टी ने इन जातीय सम्मेलनों को सामाजिक सम्मेलन का नाम दिया है।
32 सम्मेलन करने की तैयारी
पार्टी सूत्रों की मानें तो भाजपा ने 32 सम्मेलन करने का निर्णय लिया है। इन सम्मेलनों की रूपरेखा तय हो चुकी है। यह प्रदेश स्तरीय सम्मेलन इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान, गन्ना संस्थान, पंचायती राज संस्थान और विश्वेसरैया भवन के सभागार में होंगे। जिस जाति का सम्मेलन होगा, उसके एक से लेकर दो हजार तक लोगों की उपस्थिति का लक्ष्य रखा गया है।
इन सम्मेलनों के जरिए पार्टी की योजना पिछड़ी और अति पिछड़ी जाति के बुद्धिजीवी लोगों को जोड़ने की है। ताकि इनके जरिए उनके गांव-गली, इलाके के लोगों का साथ मिल सके। इन जातीय सम्मेलन में पूर्व सांसद, पूर्व विधायक, प्रधान, पूर्व प्रधान, मौजूदा और पूर्व जिला पंचायत, क्षेत्र पंचायतों के सदस्य, सामाजिक और जातीय संगठनों के मुखिया सहित संबंधित जाति के अन्य प्रभावशाली चेहरों को आमंत्रित किया जाएगा। इन जातीय सम्मेलनों में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उपमुख्यंमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह, प्रदेश महामंत्री संगठन सुनील बंसल सहित अन्य प्रमुख चेहरे शामिल होंगे।
